Karnataka : वेस्टर्न घाट के संरक्षण के लिए नेशनल पॉलिसी बनाने का प्रस्ताव
Karnataka कर्नाटक: वेस्टर्न घाट के पर्यावरणीय संरक्षण को लेकर एक नई पहल की गई है। वेस्टर्न घाट कंज़र्वेशन टास्क फ़ोर्स कमेटी ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें वेस्टर्न घाट के लिए नेशनल पॉलिसी बनाने की मांग की गई है। यह कदम वेस्टर्न घाट के इकोलॉजिकल बैलेंस को बनाए रखने और बढ़ते मानव और कमर्शियल दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वेस्टर्न घाट, जो एक UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, लगभग 1,600 किलोमीटर लंबाई में फैला हुआ है और इसमें कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु और गुजरात के हिस्से शामिल हैं। इन राज्यों में से अधिकांश पर्वतीय इलाका कर्नाटक में स्थित है, जो कुल क्षेत्र का लगभग 75 प्रतिशत है।
टास्क फ़ोर्स ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और क्लाइमेट चेंज मंत्रालय, कर्नाटक सरकार और अन्य संबंधित राज्यों को पत्र लिखकर वेस्टर्न घाट के संरक्षण के लिए एक समन्वित और राष्ट्रीय स्तर की पॉलिसी बनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यह कदम लंबे समय में पर्यावरणीय स्थिरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों ने बार-बार चेतावनी दी है कि वेस्टर्न घाट का इकोलॉजिकल बैलेंस खतरे में है। इसके प्रमुख कारणों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, रिसॉर्ट्स और होमस्टे जैसे कमर्शियल डेवलपमेंट शामिल हैं। ये गतिविधियां न केवल जंगलों और पहाड़ी इलाकों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि वनों में रहने वाले जीव-जंतु और पक्षियों के आवास को भी खतरे में डाल रही हैं।
कमेटी के सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया है कि नीति में सख्त पर्यावरणीय निगरानी, कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, और स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल होनी चाहिए। उनका कहना है कि स्थानीय समुदाय वनों और पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं, अगर उन्हें उचित अधिकार और संसाधन दिए जाएँ।
सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के कंज़र्वेशन विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्टर्न घाट का विभाजन और अंधाधुंध विकास इसे स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो इस क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे जलस्रोतों, मृदा संरचना और वन्य जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा।
वेस्टर्न घाट न केवल जैव विविधता का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र जलवायु संतुलन और बारिश के पैटर्न के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां का हर पेड़, हर जलस्रोत और हर पारिस्थितिक तंत्र इस क्षेत्र और उससे लगे राज्यों के लिए जीवनदायिनी है।
कमेटी का प्रस्ताव केंद्र और राज्यों के लिए एक संपूर्ण संरक्षण रणनीति तैयार करने का प्रयास है, जिसमें वेस्टर्न घाट को आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित तरीके से विकसित किया जा सके। प्रस्ताव में नेशनल पॉलिसी के तहत अनुसंधान, शिक्षा, निगरानी और सख्त नियमों का समावेश करने की मांग की गई है।