बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार नागरिकों को पुलिस सेवाएं और आसान बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार अब ‘एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की मदद से ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर विचार कर रही है, जिसके जरिए लोग बिना पुलिस स्टेशन जाए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर FIR भी दर्ज कराई जा सकेगी।

सरकार का उद्देश्य है कि आपात स्थिति में फंसे लोगों को जल्द से जल्द पुलिस सहायता मिल सके। नई व्यवस्था के तहत AI आधारित सिस्टम नागरिकों से घटना से जुड़ी जानकारी लेकर उसे व्यवस्थित तरीके से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज करने में मदद करेगा। इससे शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तेज, आसान और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।

अधिकारियों के अनुसार, यह पहल पुलिस व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। मौजूदा समय में कई बार पीड़ितों को FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाना पड़ता है, जिससे समय की देरी होती है। खासकर आपात स्थिति में यह प्रक्रिया पीड़ितों के लिए मुश्किल साबित हो सकती है।

एजेंटिक AI सामान्य चैटबॉट से अलग होता है। यह केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिए गए निर्देशों के आधार पर कई चरणों वाले काम को पूरा करने में सक्षम होता है। पुलिस व्यवस्था में इसका इस्तेमाल शिकायत दर्ज करने, जानकारी जुटाने और संबंधित विभाग तक सूचना पहुंचाने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार इससे पहले भी थाने गए बिना FIR दर्ज कराने की दिशा में प्रयास कर चुकी है। वर्ष 2014 में पुलिस ने बेंगलुरु के मंत्री मॉल में भारत का पहला ‘रिमोट FIR सेंटर’ शुरू किया था। इस परियोजना में सिस्को (Cisco) ने तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी। इसका उद्देश्य लोगों को दूर से ही पुलिस सेवा उपलब्ध कराना था।

हालांकि, समय के साथ तकनीक में तेजी से बदलाव आया है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन की मदद से ऐसी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि AI आधारित प्रणाली से पुलिस और आम जनता के बीच संपर्क बेहतर हो सकता है।

नई व्यवस्था में AI नागरिकों से घटना की जानकारी लेने के बाद जरूरी सवाल पूछ सकता है। इसके आधार पर शिकायत का प्रारूप तैयार किया जा सकता है और उसे संबंधित पुलिस थाने या विभाग तक भेजा जा सकता है। इससे पुलिसकर्मियों का समय भी बच सकता है और शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकती है।

हालांकि, AI आधारित FIR व्यवस्था को लागू करने से पहले कई सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर ध्यान देना होगा। अधिकारियों के अनुसार, शिकायतों की सत्यता की जांच, गलत सूचना को रोकना और संवेदनशील मामलों में मानवीय निगरानी बनाए रखना जरूरी होगा।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस जैसी महत्वपूर्ण सेवा में AI का इस्तेमाल करते समय डेटा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। नागरिकों की निजी जानकारी और शिकायतों से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी होगा।

कर्नाटक पहले से ही तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। बेंगलुरु देश का प्रमुख आईटी हब है और राज्य सरकार लगातार डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ऐसे में पुलिस व्यवस्था में AI का इस्तेमाल राज्य को स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में आगे ले जा सकता है।

सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है। उन्हें छोटी शिकायत या आपात स्थिति में पुलिस स्टेशन जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।

इसके अलावा, AI आधारित सिस्टम पुलिस रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और शिकायतों की प्राथमिकता तय करने में भी मदद कर सकता है। इससे गंभीर मामलों पर पुलिस तेजी से ध्यान केंद्रित कर सकेगी।

फिलहाल कर्नाटक सरकार इस योजना के तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। अंतिम निर्णय विशेषज्ञों की राय और परीक्षण के बाद लिया जाएगा। अगर यह योजना सफल होती है तो कर्नाटक देश में AI आधारित पुलिस सेवाओं की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर सकता है।

थाने गए बिना FIR दर्ज कराने की यह पहल नागरिक सुविधा और डिजिटल पुलिसिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इसे किस तरह लागू करती है और इसका वास्तविक लाभ आम लोगों तक कैसे पहुंचता है।