बेंगलुरु। कर्नाटक के चामराजनगर जिले में कथित एनकाउंटर में तीन लोगों की मौत का मामला अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। सोमवार को विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी भाजपा और जेडीएस नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाते हुए मामले की न्यायिक जांच, मृतकों के परिवारों को मुआवजा और वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे की मांग की।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चामराजनगर घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने मांग की कि मामले की न्यायिक जांच कराई जाए और मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच करा रही है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेताओं को लगता है कि इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए तो वे खुद भी अपनी जिम्मेदारी तय करने के लिए तैयार हैं।

रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि फिलहाल मामले की मजिस्ट्रेट स्तर की जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। मंत्री ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने कहा कि अगर जांच में यह साबित होता है कि मारे गए लोग किसान नहीं बल्कि अवैध शिकार में शामिल लोग थे, तो मुआवजे का सवाल अलग तरीके से देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हट रही है।

रामलिंगा रेड्डी ने सदन को भरोसा दिलाया कि यदि जांच में वन विभाग के अधिकारियों की किसी भी तरह की लापरवाही या गलती सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के अनुसार कदम उठाएगी और किसी को भी बचाने की कोशिश नहीं की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट तीन दिन के भीतर आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र अभी दो सप्ताह तक चलेगा और रिपोर्ट सदन के सामने रखी जाएगी। यदि रिपोर्ट से सरकार संतुष्ट नहीं होती है तो मुख्यमंत्री के साथ चर्चा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि, विपक्षी सदस्य इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और न्यायिक जांच की मांग पर अड़े रहे। भाजपा और जेडीएस नेताओं ने आरोप लगाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल विभागीय या मजिस्ट्रेट जांच पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए न्यायिक जांच जरूरी है।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि गोलीबारी की घटना में कई सवाल अनुत्तरित हैं और सरकार को पारदर्शिता के साथ मामले की जांच करानी चाहिए। नेताओं ने कहा कि मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।

इस मुद्दे पर विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। विपक्षी सदस्यों ने सदन में मामले पर चर्चा की मांग की। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और तत्काल बहस कराने की मांग रखी।

बताया गया कि विपक्ष द्वारा चर्चा की मांग के बीच नए विधानसभा अध्यक्ष जी.एस. पाटिल ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, लेकिन हंगामे के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके चलते सदन में कुछ समय के लिए अव्यवस्था बनी रही।

चामराजनगर की घटना के बाद से ही राज्य में राजनीतिक बहस तेज है। वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई अवैध शिकार रोकने के दौरान हुई थी और कर्मचारियों ने परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाया। वहीं, मृतकों के परिवार और विपक्ष इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में वन संरक्षण और मानव अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है। जहां अवैध शिकार रोकना वन विभाग की जिम्मेदारी है, वहीं किसी भी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

फिलहाल इस मामले की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गोलीबारी की परिस्थितियां क्या थीं और क्या किसी अधिकारी की ओर से कोई गलती हुई थी। वहीं, विपक्ष की न्यायिक जांच की मांग के कारण यह मामला आने वाले दिनों में भी राजनीतिक रूप से गरम रहने की संभावना है।

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