Bengaluru बेंगलुरु: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा केंद्रीय संसदीय समिति के सदस्य बी.एस. येदियुरप्पा को झटका देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत उनके खिलाफ आरोपों को खारिज करने से इनकार कर दिया।हालांकि, पीठ ने येदियुरप्पा को अदालत में अग्रिम जमानत दे दी, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से छूट मिल गई।न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाया और मामले को
POCSO
अदालत में वापस भेज दिया। हालांकि, अदालत ने येदियुरप्पा के खिलाफ अदालत में पेश किए गए आरोप पत्र को भी खारिज करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने याचिकाकर्ता येदियुरप्पा द्वारा प्रस्तुत मामले की पात्रता पर भी कोई टिप्पणी नहीं की।अदालत ने 17 जनवरी को मामले में दलीलें और प्रतिवाद समाप्त करने के बाद मामले को निर्णय के लिए सुरक्षित रख लिया था।अब उनके खिलाफ फैसला आने के बाद, येदियुरप्पा को मामले में कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि मामले को रद्द करने के लिए येदियुरप्पा की याचिका सोची-समझी थी, क्योंकि यह पीड़िता की मां की मौत के बाद दायर की गई थी, जो शिकायतकर्ता थीं। येदियुरप्पा का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील सी.वी. नागेश ने कहा कि उनके मुवक्किल को शिकायतकर्ता की मौत के बारे में पता नहीं हो सकता था, और वह कोई जादूगर नहीं थे। उन्होंने अदालत से कथित घटना और एफआईआर दर्ज होने के बीच 45 दिनों के अंतराल पर विचार करने का आग्रह किया। वकील ने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया, वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज करने के उसके कथित इतिहास की ओर इशारा किया। यह मामला बेंगलुरु के सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन में एक नाबालिग लड़की की मां द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से उपजा है, जिसमें येदियुरप्पा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आरोप राजनीति से प्रेरित थे और वह कानूनी कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार हैं। मामले की जांच कर रहे आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने 27 जून, 2024 को एक विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
आरोप पत्र के अनुसार, येदियुरप्पा पर तीन अन्य आरोपियों के साथ POCSO अधिनियम और IPC की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिसमें 354 (ए) (यौन उत्पीड़न), 204 (दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करना) और 214 (अपराध को छिपाने के लिए रिश्वत की पेशकश करना) शामिल हैं।आरोप पत्र में आरोप लगाया गया है कि 2 फरवरी, 2024 को शिकायतकर्ता अपनी 17 वर्षीय बेटी पर यौन उत्पीड़न के संबंध में मदद मांगने के लिए येदियुरप्पा के आवास पर गई थी। इसमें दावा किया गया है कि येदियुरप्पा लड़की को एक कमरे में ले गए, उसे बंद कर दिया और उसका यौन उत्पीड़न किया।
पीड़िता ने विरोध किया और कमरे से बाहर चली गई। इसके बाद, येदियुरप्पा ने कथित तौर पर उनकी मदद करने से इनकार कर दिया।चार्जशीट में आगे कहा गया है कि जब पीड़िता ने घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए, तो येदियुरप्पा ने बिचौलियों के ज़रिए उन्हें अपने घर बुलाया और उन्हें 2 लाख रुपये नकद दिए। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया और फोन गैलरी से मीडिया फ़ाइलों को डिलीट करवा दिया।
पीड़िता की माँ का 26 मई, 2024 को स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण बेंगलुरु में निधन हो गया। येदियुरप्पा ने आरोपों का पुरज़ोर खंडन करते हुए कहा, “मेरे घर के पास एक माँ और बेटी परेशान दिख रही थीं। दया के कारण, मैंने उनकी स्थिति के बारे में पूछताछ करने के लिए उन्हें फ़ोन किया। मैंने उनकी मदद के लिए बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर को भी फ़ोन किया। हालाँकि, उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ आरोप लगाना शुरू कर दिया। इसके बावजूद, मैंने उन्हें आर्थिक मदद दी। मैं इन आरोपों का अदालत में सामना करूँगा।”
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