Karnataka : सरकार का कदम, फसलों को राहत देने की कोशिश

Update: 2026-07-05 05:36 GMT

Karnataka कर्नाटक: राज्य भर में कमजोर मानसूनी बारिश के चलते फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच धारवाड़ जिले के प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली ने घोषणा की है कि खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए अगले दो दिनों में हुबली और हावेरी जिलों में कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) का अभियान चलाया जाएगा।

यह निर्णय धारवाड़ में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद लिया गया। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं और तकनीकी स्तर पर कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि इस समय राज्य के कई हिस्सों में मानसून कमजोर पड़ा हुआ है, जिससे जून में बोई गई फसलों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता किसानों की फसलों को बचाना और कृषि नुकसान को कम करना है।

उन्होंने कहा, “मानसून की बारिश कमजोर है और जून में बोई गई फसलें गंभीर तनाव में हैं। हमारी तत्काल प्राथमिकता इन फसलों की रक्षा करना है।” इसी उद्देश्य से प्रभावित जिलों में कृत्रिम बारिश कराने का निर्णय लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, हुबली और हावेरी क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी की कमी देखी जा रही है, जिससे धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों के बीच भी इस स्थिति को लेकर चिंता का माहौल है।

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें बादलों में विशेष रसायनों का छिड़काव कर वर्षा की संभावना को बढ़ाया जाता है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत मिल सकती है।

अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के लिए मौसम की स्थिति और बादलों की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों की टीम लगातार डेटा का विश्लेषण कर रही है ताकि सही समय पर ऑपरेशन किया जा सके।

जिला प्रशासन ने भी इस योजना को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं और संबंधित एजेंसियों को समन्वय के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को भी इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

सरकार का कहना है कि यह कदम आपात स्थिति में फसलों को बचाने के लिए उठाया जा रहा है और इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए आगे अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है।

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