बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के शुरुआती चरण में सूखा प्रभावित घोषित किए गए 101 तालुकों में फसल और आर्थिक नुकसान का कुल अनुमान करीब 18,000 करोड़ रुपये लगाया गया है। राज्य सरकार अब इस नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत आर्थिक सहायता मांगने की तैयारी कर रही है। उप-मुख्यमंत्री और राजस्व विभाग का प्रभार संभाल रहे डॉ. जी. परमेश्वर ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पत्रकारों से बातचीत में परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही केंद्र सरकार को आपदा राहत के लिए अपना पहला आधिकारिक अनुरोध भेजेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूखे से हुए नुकसान का आकलन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जैसे-जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नुकसान का विस्तृत और व्यापक मूल्यांकन पूरा होगा, सरकार की ओर से केंद्र को अतिरिक्त अनुरोध भी भेजे जाएंगे।

उन्होंने कहा कि शुरुआती आकलन के मुताबिक 101 तालुकों में फसल के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी बड़े स्तर पर हुआ है। इन इलाकों में बारिश की कमी का सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ा है। किसानों को फसल उत्पादन में कमी, सिंचाई की समस्या और खेती की लागत बढ़ने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार नुकसान के वास्तविक आंकड़ों को जुटाकर उसके आधार पर केंद्र से राहत राशि की मांग करेगी।

101 तालुक आधिकारिक तौर पर सूखा प्रभावित

कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार के सूखा आकलन मैनुअल-2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर 101 तालुकों को पहले ही आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है। सूखे की स्थिति का आकलन केवल बारिश की कमी के आधार पर नहीं किया गया है, बल्कि कई वैज्ञानिक और भौगोलिक मानकों को ध्यान में रखा गया है।

इन मानकों में सैटेलाइट इमेज, मिट्टी में नमी की स्थिति और बारिश में कमी की अवधि प्रमुख हैं। इन विभिन्न संकेतकों के आधार पर संबंधित क्षेत्रों की स्थिति का मूल्यांकन किया गया और इसके बाद उन्हें सूखा प्रभावित घोषित किया गया।

राज्य सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जा रहा है, ताकि केंद्र सरकार के सामने राहत राशि की मांग के दौरान ठोस आंकड़े और तथ्य प्रस्तुत किए जा सकें। अधिकारियों की ओर से नुकसान का क्षेत्रवार और फसलवार विवरण भी तैयार किया जा रहा है।

42 तालुकों में मौके पर जांच

परमेश्वर ने बताया कि राज्य के 42 और तालुकों में मौके पर जाकर सूखे की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इनमें से 24 तालुकों में जांच पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 18 तालुकों में अधिकारियों की टीम अभी मौके पर जाकर स्थिति का जायजा ले रही है।

मौके पर होने वाले इस आकलन में कृषि क्षेत्र पर सूखे के प्रभाव के अलावा स्थानीय परिस्थितियों और फसल नुकसान को भी देखा जा रहा है। इन जांचों के पूरा होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने अतिरिक्त तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की आवश्यकता है।

सरकार का मानना है कि सभी क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों को एकत्र करने के बाद सूखे से हुए कुल नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होगी। इसी आधार पर केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग की जाएगी।

पिछली बार सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा था

उप-मुख्यमंत्री परमेश्वर ने पिछली बार कर्नाटक में पड़े सूखे के दौरान केंद्र से मिली राहत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग की थी, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिलने के बाद राज्य को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।

उन्होंने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के बाद कर्नाटक को करीब 3,500 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी। परमेश्वर ने उम्मीद जताई कि इस बार ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होगी और केंद्र सरकार राज्य की मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए नियमों के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगी।

राज्य सरकार अब अपने पहले आधिकारिक ज्ञापन के जरिए केंद्र के सामने सूखे से हुए नुकसान और राहत की जरूरत का विस्तृत ब्योरा रखने की तैयारी में है। इसके बाद अतिरिक्त तालुकों के आकलन और नुकसान के आंकड़े सामने आने पर अलग-अलग चरणों में और सहायता की मांग की जा सकती है।

किसानों पर सबसे ज्यादा असर

सूखे की सबसे बड़ी मार कृषि क्षेत्र पर पड़ रही है। बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में फसलों की स्थिति प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों की आय पर असर पड़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

राज्य सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे प्रभावित किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को राहत उपलब्ध करानी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता हासिल करनी है। करीब 18,000 करोड़ रुपये के शुरुआती नुकसान का अनुमान इस चुनौती की गंभीरता को दर्शाता है।

परमेश्वर के बयान के बाद अब निगाहें राज्य सरकार के उस आधिकारिक अनुरोध पर टिकी हैं, जिसे जल्द ही केंद्र को सौंपा जाना है। 101 तालुकों के लिए तैयार किए जा रहे नुकसान के आंकड़े और 42 अन्य तालुकों में जारी जांच के परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कर्नाटक केंद्र से कितनी राहत राशि की मांग करता है।

सरकार को उम्मीद है कि वैज्ञानिक मानकों और जमीनी आकलन के आधार पर तैयार रिपोर्ट के जरिए केंद्र से समय पर सहायता हासिल की जा सकेगी और सूखे से प्रभावित किसानों तथा अन्य वर्गों को राहत पहुंचाई जा सकेगी।

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