मैसूर। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और बेंगलुरु शहरी विकास मंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार बेंगलुरु पर बढ़ते आबादी के दबाव, ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए राज्य के पांच प्रमुख शहरों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा कि बेंगलुरु की तुलना में सांस्कृतिक शहर मैसूर अधिक व्यवस्थित और सुनियोजित शहर है। सरकार अब मैसूर समेत अन्य बड़े शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना पर काम कर रही है।

मैसूर में कार्यक्रम के दौरान दिया बयान

डीके शिवकुमार ने शनिवार को मैसूर के ओवल ग्राउंड में डॉ. श्री शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामीजी की 111वीं जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राज्य सरकार की शहरी विकास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के प्रमुख शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकसित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि बेंगलुरु की बढ़ती आबादी के कारण शहर पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अन्य शहरों को भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के केंद्र के रूप में विकसित करना जरूरी है।

पांच बड़े शहरों के लिए विशेष योजना

डीके शिवकुमार ने बताया कि सरकार ने कर्नाटक के पांच प्रमुख शहरों के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार करने का फैसला किया है।

इन शहरों में:

मैसूर

बेलगावी (बेलगाम)

हुबली-धारवाड़

कलबुर्गी

बेंगलुरु

शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन शहरों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

बेंगलुरु का बोझ कम करने की कोशिश

डीके शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु देश के प्रमुख आईटी और आर्थिक केंद्रों में शामिल है, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के कारण शहर में कई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रैफिक जाम, सड़क व्यवस्था पर दबाव और अन्य शहरी समस्याओं को कम करने के लिए जरूरी है कि राज्य के अन्य शहरों को भी तेजी से विकसित किया जाए।

सरकार का उद्देश्य यह है कि लोगों को रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए केवल बेंगलुरु पर निर्भर न रहना पड़े।

मैसूर को बताया बेहतर नियोजित शहर

शिवकुमार ने मैसूर की शहरी व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि यह शहर बेंगलुरु की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुनियोजित है।

उन्होंने कहा कि मैसूर अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ अब आर्थिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में भी आगे बढ़ सकता है।

सरकार मैसूर की मौजूदा सुविधाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करेगी।

ट्रैफिक समस्या के समाधान पर जोर

बेंगलुरु समेत कई शहरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या को देखते हुए सरकार ने रिंग रोड परियोजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

डीके शिवकुमार ने बताया कि ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए कई छोटे और बड़े शहरों में अलग-अलग रिंग रोड परियोजनाओं को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों के अंदर वाहनों का दबाव कम करना और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

रोजगार और निवेश बढ़ाने की योजना

सरकार की योजना केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डीके शिवकुमार ने कहा कि उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास से युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

उन्होंने कहा कि संतुलित विकास के लिए जरूरी है कि राज्य के सभी बड़े शहरों में समान रूप से सुविधाएं विकसित की जाएं।

शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा

कर्नाटक सरकार का मानना है कि बड़े शहरों के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मैसूर, बेलगावी, हुबली-धारवाड़ और कलबुर्गी जैसे शहरों में बेहतर सुविधाएं विकसित होती हैं तो बेंगलुरु पर दबाव कम हो सकता है।

भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकास

डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शहरों की योजना बना रही है।

आधुनिक परिवहन व्यवस्था, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक के शहरों को ऐसा विकसित किया जाएगा, जहां लोगों को बेहतर जीवन स्तर और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिल सकें।

फिलहाल राज्य सरकार की इस योजना को बेंगलुरु के साथ-साथ अन्य प्रमुख शहरों के संतुलित विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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