बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए मौजूदा स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने और मतदाता सूची का नए सिरे से पुनरीक्षण कराने की मांग की। शिवकुमार ने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और चुनावी डेटा की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने कहा कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने भी मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। शिवकुमार ने कहा कि मामला किसी एक राजनीतिक दल के मतदाताओं का नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के मताधिकार से जुड़ा है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि मौजूदा मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में आम नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और इसका राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ऐसी चिंताएं दूसरे राज्यों में भी सामने आई हैं और अब कर्नाटक में भी मतदाता सूची को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ये आरोप शिवकुमार और कांग्रेस के हैं; चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के आरोपों का विरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने मौजूदा SIR प्रक्रिया को खत्म कर नए सिरे से मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और किसी नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर नहीं होना चाहिए। उन्होंने चुनावी डेटा की दोबारा जांच और पूरी प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की भी मांग की।
शिवकुमार इससे पहले भी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के लिए अधिक समय देने की मांग कर चुके हैं। अगस्त में उन्होंने चुनाव आयोग से दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाने का आग्रह किया था। उस समय कर्नाटक में 1.08 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और अन्य श्रेणियों में चिह्नित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या के समान नहीं है, क्योंकि चिह्नित मामलों पर सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया होती है।
गुरुवार को शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उनसे पद छोड़ने की मांग की। उनकी टिप्पणी उन मीडिया रिपोर्टों की पृष्ठभूमि में आई जिनमें चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। शिवकुमार ने इन रिपोर्टों के आधार पर आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाया।
हालांकि चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि किसी संस्था में विचारों और टिप्पणियों में अंतर विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग का कहना है कि पिछले एक वर्ष में उसके आदेश पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। आयोग के अधिकारियों ने देशव्यापी SIR से जुड़े फैसलों पर भी आयोग के एकमत होने की बात कही है।
शिवकुमार ने कहा कि SIR जैसे व्यापक अभियान में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अशिक्षित और वंचित वर्गों के पात्र मतदाताओं को दस्तावेज या प्रक्रिया से जुड़ी कठिनाइयों के कारण नुकसान न हो। उन्होंने फॉर्म 6, 7 और 8 सहित मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया तथा मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस विषय पर व्यापक राजनीतिक और संसदीय चर्चा होनी चाहिए। उनके मुताबिक मतदाता सूची से जुड़ा मुद्दा केवल कांग्रेस या बीजेपी के समर्थकों तक सीमित नहीं है और हर पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की मतदाता सूची को अंतिम रूप दिए जाने और पात्र लोगों को अपनी आपत्तियां तथा दावे रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
कर्नाटक कांग्रेस ने हाल के दिनों में SIR प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियों की शिकायत करते हुए राज्यव्यापी समीक्षा, आंकड़ों की जांच और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अद्यतन और सही बनाना है। आयोग ने अपने भीतर मतभेद से जुड़ी रिपोर्टों पर भी कहा है कि अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है और अंतिम आदेश सामूहिक निर्णय से लिए गए हैं।
इस तरह कर्नाटक में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। डीके शिवकुमार ने प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से मतदाता सूची तैयार करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है, जबकि चुनाव आयोग अपने निर्णयों को सामूहिक और संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है। आने वाले दिनों में मतदाता सूची के अंतिम रूप और SIR से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।