Vehicle ईंधन नीति पर अदालत में बढ़ी बहस

Update: 2026-06-30 12:50 GMT

Karnataka:सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को इथेनॉल सप्लाई आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। यह मामला देश की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर कानूनी और नीतिगत बहस तेज हो गई है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुदेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने की। यह याचिका भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को वर्ष 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया था।
BPCL की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना था कि देश में लागू 20 प्रतिशत इथेनॉल-पेट्रोल ब्लेंडिंग (E20 फ्यूल) की नीति एक निर्धारित योजना के तहत चल रही है और इसमें अचानक बदलाव से ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता आ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फिलहाल मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल अमल नहीं होगा और मौजूदा नीति के अनुसार ही काम जारी रहेगा।
भारत सरकार पहले से ही इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा दे रही है, जिसके तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। इस ईंधन मिश्रण को E20 फ्यूल कहा जाता है। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी कम होती है।
हालांकि, इस नीति को लेकर समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर सवाल भी उठते रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन की क्षमता, फ्यूल क्वालिटी और लंबी अवधि के प्रभावों को ध्यान में रखकर ही ऐसी नीतियों को लागू किया जाना चाहिए।
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