बेलगावी। कर्नाटक में गन्ने की उचित कीमत को लेकर किसानों और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद फिलहाल सुलझता दिखाई नहीं दे रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गन्ना उत्पादक किसानों के प्रतिनिधियों के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक बिना किसी ठोस फैसले के समाप्त हो गई। किसानों ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के अतिरिक्त प्रति टन 1,000 रुपये देने की मांग दोहराई। वहीं मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति, गंभीर सूखे और बिजली सब्सिडी पर बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए तत्काल अतिरिक्त राशि देने में असमर्थता जताई।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बातचीत की जाएगी। इस बीच किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन से उनकी समस्याएं समाप्त नहीं होंगी और सरकार को गन्ने की कीमत पर ठोस फैसला लेना होगा।

गन्ने की कीमत पर नहीं बनी सहमति, किसानों की नाराजगी बरकरार

कर्नाटक के बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौध में सोमवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में गन्ना उत्पादकों और चीनी मिल संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य गन्ने के खरीद मूल्य को लेकर चल रहे विवाद का समाधान निकालना था। किसानों ने उत्पादन लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी का हवाला देते हुए अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग रखी।

किसान संगठनों का कहना है कि खाद, बीज, मजदूरी, सिंचाई और परिवहन का खर्च बढ़ने से गन्ने की खेती पहले की तुलना में अधिक महंगी हो गई है।

उनका तर्क है कि मौजूदा खरीद मूल्य से खेती की लागत निकालने और परिवार का खर्च चलाने में कठिनाई हो रही है। इसी कारण वे उचित एवं लाभकारी मूल्य के अतिरिक्त राज्य परामर्श मूल्य (SAP) के रूप में प्रति टन 1,000 रुपये की सहायता चाहते हैं।

किसानों ने 4,500 रुपये प्रति टन खरीद मूल्य की मांग उठाई

बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने गन्ने का खरीद मूल्य बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति टन करने की मांग भी रखी। इसके साथ ही केंद्र सरकार पर FRP बढ़ाकर 4,450 रुपये प्रति टन करने का दबाव बनाने का आग्रह किया गया।

हालांकि, अलग-अलग किसान संगठनों ने गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन तक मूल्य निर्धारित करने की मांग भी उठाई है।

किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को ऐसी मूल्य निर्धारण प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिससे खेती की वास्तविक लागत के आधार पर किसानों को लाभकारी कीमत मिल सके।

इसके अतिरिक्त किसानों ने गन्ने का भुगतान निर्धारित समय पर करने, देरी होने पर ब्याज देने और चीनी मिलों में तौल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग भी रखी।

मुख्यमंत्री बोले- राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किसानों की मांगों पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार उनकी समस्याओं को समझती है, लेकिन वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में अतिरिक्त 1,000 रुपये प्रति टन देने का फैसला करना आसान नहीं है।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक पिछले कई दशकों के सबसे गंभीर सूखे का सामना कर रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण राज्य की प्रमुख नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, भूजल स्तर में लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की समस्या भी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में सरकार को कृषि, सिंचाई और बिजली आपूर्ति पर अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं।

बिजली सब्सिडी पर 22 हजार करोड़ रुपये का खर्च

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार बिजली सब्सिडी और सिंचाई से जुड़ी विद्युत आवश्यकताओं पर लगभग 22 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

इसके अलावा हुबली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (HESCOM) ने कृषि पंपसेटों की बिजली आपूर्ति के लिए 9 हजार करोड़ से 12 हजार करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त राशि की मांग की है।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार पहले से कई वित्तीय दबावों का सामना कर रही है। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए कोई नई आर्थिक घोषणा करने से पहले उसके वित्तीय प्रभाव का आकलन करना आवश्यक है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसानों की आजीविका की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

चीनी मिल मालिकों से भी मांगा सहयोग

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गन्ने की कीमत का विवाद केवल राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से हल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और चीनी मिल मालिकों को मिलकर निर्णय लेना होगा।

बैठक में 81 चीनी मिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और गन्ने की कीमत से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए।

शिवकुमार ने चीनी मिल संचालकों से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साझा करने की अपील की।

उन्होंने पिछले वर्ष किसानों को घोषित अतिरिक्त भुगतान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपने हिस्से का योगदान दिया था, लेकिन चीनी मिलों की ओर से निर्धारित हिस्से का भुगतान पूरा नहीं हो सका।

किसान नेताओं ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की

बैठक में किसान प्रतिनिधि सुनंदा ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य निर्धारित करने के मौजूदा मानकों पर सवाल उठाए।

उन्होंने मांग की कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

इसके साथ ही सरकारी तौल केंद्रों की स्थापना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने, गन्ने का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने और विलंब होने पर ब्याज देने की मांग रखी गई।

किसान प्रतिनिधियों ने गन्ने को फसल बीमा योजना के दायरे में लाने, कृषि ऋण माफ करने और छोटे गुड़ उत्पादन उद्योगों को प्रोत्साहन देने का मुद्दा भी उठाया।

किसान नेता दर्शन पुट्टनैया ने कहा कि खेती का जोखिम किसान उठाते हैं, लेकिन फसल की कीमत तय करने में उनकी भूमिका बेहद सीमित रहती है।

उन्होंने आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और सहकारी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की भी मांग की।

29 अक्टूबर को केंद्र की समिति करेगी कर्नाटक का दौरा

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित एक समिति 29 अक्टूबर को कर्नाटक का दौरा करेगी।

राज्य सरकार इस समिति के सामने गन्ना किसानों की समस्याएं और मूल्य वृद्धि से जुड़ी मांगें रखेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र सहित अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की है, ताकि केंद्र सरकार से FRP में संशोधन की संयुक्त मांग की जा सके।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को भी बैठक में आमंत्रित किया गया था, लेकिन अन्य व्यस्तताओं के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके।

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि 29 अक्टूबर को किसानों के चयनित प्रतिनिधियों के साथ अगले दौर की चर्चा भी होगी।

आंदोलन जारी रखने को लेकर किसान संगठनों में मंथन

गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर कर्नाटक के विभिन्न जिलों में किसान पहले से आंदोलन कर रहे हैं।

बेलगावी, धारवाड़, हावेरी और आसपास के क्षेत्रों से किसानों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कुछ स्थानों पर किसानों ने सड़क जाम करके सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।

सोमवार की बैठक के दौरान किसान प्रतिनिधियों के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। कई नेताओं ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की मांग की।

किसान संगठनों का कहना है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को दोबारा तेज किया जा सकता है।

फिलहाल सभी की नजर 29 अक्टूबर को होने वाली अगली बातचीत और केंद्र सरकार की समिति के दौरे पर टिकी हुई है।

कर्नाटक में गन्ने की कीमत को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब किसानों की आय, चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय क्षमता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत से तय होगा कि सरकार और किसानों के बीच सहमति बनती है या आंदोलन और तेज होता है।

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