कावेरी जल विवाद: KRS बांध की ओर मार्च कर रहे बीजेपी नेता हिरासत में

Update: 2026-07-31 09:16 GMT

बेंगलुरु। कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया, जब वे तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने के विरोध में कृष्ण राज सागर (KRS) बांध की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

बीजेपी नेताओं ने कावेरी जल प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की नीति का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार कर्नाटक के किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि वह राज्य के जल संसाधनों की रक्षा करने में विफल रही है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि मौजूदा हालात में तमिलनाडु को पानी छोड़ा जाना किसानों के साथ अन्याय है। उनका तर्क है कि कर्नाटक खुद कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, ऐसे में राज्य के जलाशयों से दूसरे राज्य को पानी देना उचित नहीं है।

बीजेपी ने यह भी घोषणा की है कि यदि राज्य सरकार यह आश्वासन नहीं देती कि तमिलनाडु को कावेरी का पानी नहीं छोड़ा जाएगा, तो वह मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा 2 अगस्त को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर सकती है।

यह विवाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के हालिया फैसले के बाद तेज हुआ है। CWMA ने कावेरी जल विनियमन समिति के उस निर्देश को बरकरार रखा है, जिसके तहत तमिलनाडु को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का प्रावधान है।

कर्नाटक सरकार का कहना है कि राज्य में इस बार मानसून की स्थिति कमजोर रही है और कई क्षेत्रों में पानी की कमी बनी हुई है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में जलाशयों में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल पेयजल और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

वहीं, बीजेपी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह कर्नाटक के हितों की पर्याप्त पैरवी नहीं कर रही है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और राज्य सरकार को कावेरी जल मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहिए।

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। KRS बांध और आसपास के इलाकों में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। मार्च के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है। दोनों राज्यों में नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। कावेरी नदी दोनों राज्यों के लिए कृषि और पेयजल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी जल का मुद्दा कर्नाटक में हमेशा संवेदनशील रहा है और किसी भी सरकार के लिए इस पर संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। एक ओर अंतरराज्यीय समझौतों और प्राधिकरणों के आदेशों का पालन करना होता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों और जनता की चिंताओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इससे पहले कावेरी जल स्थिति की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में जलाशयों की स्थिति, जल उपलब्धता और CWMA के निर्देशों पर चर्चा की गई थी।

अब सभी की नजर 2 अगस्त को होने वाली संभावित सर्वदलीय बैठक पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में कावेरी जल विवाद को लेकर राज्य की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। हालांकि, बीजेपी के बहिष्कार की धमकी के बाद बैठक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।

फिलहाल कर्नाटक में कावेरी जल मुद्दा केवल जल प्रबंधन का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर टकराव और बढ़ने की संभावना है।

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