बेंगलुरु में गड्ढे भरने के लिए जेट पैचर का ट्रायल सड़क बंद किए बिना मरम्मत की तैयारी
बेंगलुरु। सड़कों पर छोटे गड्ढों और मरम्मत के दौरान लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए बेंगलुरु में ‘जेट पैचर’ तकनीक का परीक्षण शुरू किया गया है। शुक्रवार को विधान सौधा के पास मशीन का प्रदर्शन किया गया। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि नई तकनीक छोटे गड्ढों की मरम्मत में उपयोगी हो सकती है और इससे यातायात में रुकावट कम करने का प्रयास किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर इसका इस्तेमाल शहर के अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी बढ़ाया जाएगा।
इस पहल से जुड़े दो करोड़ रुपये के आंकड़े को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे मशीन की कीमत बताया गया है, जबकि अन्य में केंद्रीय नगर निगम की पायलट परियोजना के लिए दो करोड़ रुपये की निविदा का उल्लेख है। इसलिए इस राशि को सीधे एक मशीन की खरीद कीमत मानने के बजाय पायलट पहल की लागत के संदर्भ में देखना अधिक उचित है। मंत्री के अनुसार, परीक्षण के परिणाम आगे विस्तार का आधार बनेंगे।
पत्रकारों से बातचीत में गौड़ा ने बताया कि बेंगलुरु की सड़कों पर होने वाली क्षति एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर केवल डामर की ऊपरी परत उखड़ी है। दूसरे स्थानों पर डामर के साथ नीचे की पत्थर-बजरी वाली परत भी खराब हुई है, जिससे ज्यादा गहरे गड्ढे बने हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन अलग-अलग प्रकार के गड्ढों के लिए उपयुक्त वैज्ञानिक समाधान तलाश रहा है और जेट पैचर उन्हीं विकल्पों में से एक है।
नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य व्यस्त सड़कों पर छोटे हिस्सों की मरम्मत जल्दी करना है। जहां सामान्य मरम्मत के लिए सड़क का हिस्सा बंद करना पड़ता है, वहां वाहनों की कतार बढ़ सकती है। जेट पैचर के माध्यम से इस असुविधा को कम करने की कोशिश होगी। हालांकि, सड़क पर किसी भी मरम्मत कार्य में सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक रहती है। इसे हर परिस्थिति में यातायात पर बिल्कुल असर नहीं पड़ने की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, इस्तेमाल की जा रही उन्नत मशीन में कोल्ड-मिक्स तकनीक और सेमी डेंस बिटुमिनस कंक्रीट का उपयोग किया जाता है। इसे लगभग 50 मिलीमीटर तक गहरे गड्ढों की मरम्मत के लिए लगाया जा रहा है। इस तकनीकी सीमा से स्पष्ट होता है कि मशीन विशेष प्रकार की सड़क क्षति के लिए उपयोगी है। सड़क की निचली परतें व्यापक रूप से खराब होने पर अलग मरम्मत पद्धति की जरूरत पड़ सकती है।
पायलट परीक्षण शहर के केंद्रीय नगर निगम क्षेत्र में किया गया है। गौड़ा ने कहा कि यहां तकनीक प्रभावी साबित होने पर इसे बाकी चार नगर निगमों तक ले जाया जाएगा। इस प्रकार भविष्य की योजना शहर के सभी पांच नगर निगम क्षेत्रों को शामिल करने की है। विस्तार से पहले मशीन के प्रदर्शन, मरम्मत की गुणवत्ता और अलग-अलग सड़क परिस्थितियों में उसके उपयोग का अनुभव महत्वपूर्ण होगा।
शुक्रवार को देवराज उर्स रोड पर भी जेट पैचर से मरम्मत का प्रदर्शन किया गया। यह सड़क सरकारी कार्यालयों और महत्वपूर्ण संस्थानों के आसपास आने-जाने वाले लोगों के लिए उपयोगी मार्ग है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी की व्यापक योजना में सितंबर 2026 से सितंबर 2027 के बीच पांच मशीनों की तैनाती और करीब 14,041 वर्ग मीटर सड़क की मरम्मत का प्रस्ताव बताया गया है। इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत 2.5 करोड़ रुपये है।
पायलट पहल और व्यापक मरम्मत कार्यक्रम के आंकड़े अलग हैं। दो करोड़ रुपये वाली निविदा का उल्लेख शुरुआती परियोजना के संदर्भ में है, जबकि 2.5 करोड़ रुपये का आंकड़ा पांच मशीनों वाले बड़े कार्यक्रम से संबंधित बताया गया है। दोनों को जोड़कर कुल खर्च बताना या एक ही मशीन की कीमत के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। परियोजनाओं के अंतिम खर्च की स्थिति संबंधित आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगी।
शहर में गड्ढों की समस्या का समाधान केवल उन्हें भरने की गति से तय नहीं होगा। मरम्मत कितने समय तक टिकती है, यह भी महत्वपूर्ण है। सड़क की क्षति का सही मूल्यांकन करने से उपयुक्त तकनीक चुनी जा सकती है। यदि नुकसान केवल ऊपरी सतह तक है तो छोटे हिस्से की मरम्मत पर्याप्त हो सकती है। लेकिन नीचे की परत खराब होने पर केवल सतह भरने से समस्या दोबारा सामने आने की संभावना रहती है।
गौड़ा का कहना है कि भविष्य में गड्ढों की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार अलग-अलग तकनीक अपनाई जा सकती है। इससे नई मशीन को शहर की पूरी सड़क समस्या का एकमात्र समाधान मानने के बजाय मरम्मत व्यवस्था के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन के लिए चुनौती उचित स्थान पर उचित तरीका चुनने और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की होगी।
फिलहाल जेट पैचर का परीक्षण छोटे गड्ढों की तेज मरम्मत और यातायात में कम बाधा की दिशा में उठाया गया कदम है। इसकी वास्तविक उपयोगिता परीक्षण तथा बाद के संचालन से स्पष्ट होगी। सफल परिणाम मिलने पर शहर के अन्य नगर निगम क्षेत्रों में विस्तार से ज्यादा सड़कों पर इस तकनीक का इस्तेमाल हो सकेगा।