
बेंगलुरु। कावेरी जल को लेकर राज्य में मौजूदा स्थिति और हालिया आदेशों की समीक्षा के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों के मद्देनजर राज्य में जल उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
कर्नाटक मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, पुलिस महानिदेशक (DGP) सलीम अहमद समेत कई वरिष्ठ नौकरशाह और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने राज्य में कावेरी नदी के जल भंडार, जलाशयों की स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में पानी की जरूरतों को लेकर मुख्यमंत्री को जानकारी दी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य कावेरी जल प्रबंधन से जुड़े हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा करना और राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करना था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जल संसाधनों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने को कहा।
कावेरी नदी का पानी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पेयजल, सिंचाई और कृषि गतिविधियों के लिए इस नदी पर बड़ी निर्भरता है। ऐसे में जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।
कर्नाटक सरकार की ओर से बैठक में राज्य के जलाशयों में उपलब्ध पानी, मानसून की स्थिति और किसानों की जरूरतों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि जल प्रबंधन को लेकर सभी पहलुओं का आकलन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे जल संसाधनों का संतुलित और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य के किसानों और आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएं।
बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। कावेरी जल से जुड़े मामलों में कई बार विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलती रही हैं। इसे देखते हुए पुलिस अधिकारियों से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयार रहने को कहा गया।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि राज्य के जल हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। वहीं, जल प्रबंधन से जुड़े फैसले तकनीकी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लिए जाएंगे।
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण केंद्र सरकार के तहत काम करने वाली संस्था है, जो कावेरी नदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन से जुड़े मामलों की निगरानी करती है। इसके आदेशों का प्रभाव दोनों राज्यों की जल नीति पर पड़ता है।
कर्नाटक में कावेरी बेसिन के कई जिलों में खेती के लिए नदी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में जल की उपलब्धता किसानों के लिए अहम मुद्दा है। सरकार लगातार जलाशयों के जलस्तर और बारिश की स्थिति की समीक्षा करती रहती है।
बैठक के बाद अधिकारियों ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे। राज्य प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जल संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल में सहयोग करें।
फिलहाल कर्नाटक सरकार कावेरी जल प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं पर नजर बनाए हुए है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक को राज्य की जल नीति और भविष्य की रणनीति तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





