बेंगलुरु : कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ 10 दिनों की 175 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू कर दी है। यह यात्रा रायचूर जिले के लिंगसुगुर से शुरू होकर बल्लारी तक जाएगी। बीजेपी इसे कांग्रेस सरकार की नीतियों और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण अभियान के रूप में पेश कर रही है।
बीजेपी की इस पदयात्रा का सीधा निशाना मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार है। पार्टी ने कई मुद्दों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलने की रणनीति बनाई है। हालांकि शुरुआत में यह आंदोलन वाल्मीकि निगम मामले को लेकर शुरू किया गया था, लेकिन अब बीजेपी ने इसे व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप दे दिया है।
वाल्मीकि निगम मामले को बीजेपी बना रही बड़ा मुद्दा
बीजेपी का आरोप है कि कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति कल्याण से जुड़े फंड के इस्तेमाल में अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर लगातार हमलावर है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जनता के पैसे का हिसाब लिया जाना चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मामले में मंत्री रहे बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद भी बीजेपी ने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा है।
डीके शिवकुमार के लिए क्यों बढ़ी मुश्किलें
कर्नाटक के डिप्टी सीएम और कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार डीके शिवकुमार के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। बीजेपी पदयात्रा के जरिए सरकार की छवि पर सवाल उठाने की कोशिश कर रही है।
शिवकुमार को एक तरफ विपक्ष के हमलों का जवाब देना है तो दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाए रखना है। बीजेपी इस यात्रा के जरिए ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ बढ़ाने और कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
इसके अलावा बीजेपी बेंगलुरु से जुड़े विकास प्रोजेक्ट, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों को भी चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी का लक्ष्य आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनता के बीच कांग्रेस सरकार की कमजोरियां गिनाना है।
कांग्रेस भी तैयार कर रही जवाबी रणनीति
बीजेपी की पदयात्रा के जवाब में कांग्रेस भी राजनीतिक तैयारी में जुट गई है। डीके शिवकुमार ने साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी बीजेपी के अभियान का जवाब अपने तरीके से देगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक आरोप लगा रहा है और सरकार जनता के हित में काम कर रही है।
कांग्रेस का फोकस अपनी योजनाओं और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने पर है। पार्टी बीजेपी के आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर मुकाबला करने की तैयारी कर रही है।
2028 चुनाव की तैयारी का पहला बड़ा संकेत
कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2028 को देखते हुए बीजेपी की यह पदयात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी अभी से संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है। 175 किलोमीटर की यह यात्रा कई विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जिससे बीजेपी को जमीनी स्तर पर संपर्क बढ़ाने का मौका मिलेगा।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दे तलाश रही बीजेपी इस यात्रा के जरिए चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस के लिए चुनौती है कि वह सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाए और विपक्ष के हमलों का प्रभावी जवाब दे।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ेगा सियासी टकराव
कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिनों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है। बीजेपी जहां भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपनी योजनाओं और जनकल्याणकारी कामों को आधार बनाकर जवाब देने की कोशिश करेगी।
फिलहाल 10 दिनों की यह पदयात्रा सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि आने वाले चुनावी संघर्ष की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है। डीके शिवकुमार के लिए यह समय संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत रखने की परीक्षा होगी।
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