Karnataka कर्नाटक: राजधानी बेंगलुरु के जाने-माने वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेशनिस्ट और रेप्टाइल कीपर मोहम्मद अनीस (55) का 30 जून 2026 को निधन हो गया। पिछले लगभग 12 दिनों से वह सांस लेने में दिक्कत और रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से जूझ रहे थे। इलाज के दौरान स्थिति में सुधार नहीं होने पर उन्होंने शहर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
मोहम्मद अनीस को बेंगलुरु में एक ऐसे विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता था, जिनका नाम घरों, अपार्टमेंट, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर सांप दिखाई देने की स्थिति में सबसे पहले याद किया जाता था। वे वर्षों से सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने का काम करते रहे।
उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में थी, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों सांपों को बचाया और उन्हें सुरक्षित जंगलों में छोड़ा। इस कार्य ने उन्हें न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े समुदाय में भी विशेष पहचान दिलाई।
अनीस ने बहुत कम उम्र से ही इस क्षेत्र में काम शुरू कर दिया था। उन्होंने 17 साल की उम्र में अपना पहला सांप बचाकर इस सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उनका यह कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा और लगभग चार दशकों तक उन्होंने वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई।
अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने हजारों सांपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा, जिनमें मुख्य रूप से बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क जैसे वन क्षेत्र शामिल रहे। उनके काम ने शहरी इलाकों में लोगों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
अनीस ने कुछ समय तक चेन्नई स्नेक पार्क में भी काम किया, जहां उन्हें विश्व प्रसिद्ध हर्पेटोलॉजिस्ट रोमुलस व्हिटेकर के साथ काम करने का अवसर मिला। इस अनुभव ने उनके ज्ञान और कार्यक्षमता को और अधिक समृद्ध किया।
उनके निधन की खबर से पर्यावरण प्रेमियों और वाइल्डलाइफ़ कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। कई लोगों ने उन्हें एक ऐसे समर्पित कार्यकर्ता के रूप में याद किया, जिन्होंने बिना किसी भय के सांपों को बचाने और लोगों को सुरक्षित रखने का काम किया।
स्थानीय स्तर पर भी लोग उन्हें एक भरोसेमंद रेस्क्यू विशेषज्ञ के रूप में जानते थे, जो किसी भी समय सांप निकलने की सूचना पर तुरंत पहुंच जाते थे।
कुल मिलाकर, मोहम्मद अनीस का जीवन वन्यजीव संरक्षण और विशेष रूप से सांपों के रेस्क्यू के लिए समर्पित रहा, और उनका योगदान बेंगलुरु शहर में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।