SIR प्रक्रिया के तहत वोटर रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन का 100% डिजिटाइजेशन पूरा
बेंगलुरु। राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता पंजीकरण से जुड़े आवेदन पत्रों का 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने रविवार को इसकी जानकारी दी। चुनावी सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने के उद्देश्य से चल रही इस प्रक्रिया के दौरान करोड़ों मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
CEO कार्यालय के अनुसार, राज्य में कुल 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 1,09,13,776 मतदाताओं, यानी करीब 19.69 प्रतिशत, की पहचान ASDDO श्रेणी में की गई है। ASDDO का इस्तेमाल ऐसे मतदाताओं के लिए किया गया है, जो अनुपस्थित, विस्थापित, मृत, संदिग्ध/फर्जी या अन्य कारणों से सामान्य सत्यापन प्रक्रिया में नहीं पाए गए हैं।
वहीं, बाकी 4,45,18,538 मतदाताओं ने अपने सेंसस एप्लीकेशन पर हस्ताक्षर कर उन्हें संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को सौंप दिया है। इसके साथ ही मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
100 प्रतिशत आवेदन का डिजिटाइजेशन
CEO कार्यालय ने बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत प्राप्त वोटर रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन का डिजिटाइजेशन पूरी तरह पूरा कर लिया गया है। डिजिटाइजेशन के बाद मतदाताओं से संबंधित जानकारी को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है, जिससे आगे की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी सूची में योग्य मतदाताओं के नाम बने रहें और ऐसे नामों की पहचान की जा सके, जो मृत्यु, स्थायी विस्थापन या अन्य कारणों से अब संबंधित क्षेत्र में मौजूद नहीं हैं।
1.09 करोड़ मतदाता ASDDO श्रेणी में
आंकड़ों के मुताबिक, कुल मतदाताओं में से 1,09,13,776 यानी 19.69 प्रतिशत को ASDDO श्रेणी में रखा गया है। इन मतदाताओं को अलग-अलग कारणों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
इनमें सबसे बड़ी संख्या स्थायी रूप से विस्थापित मतदाताओं की है। कुल 65,85,791 मतदाता, यानी करीब 11.88 प्रतिशत, ऐसे पाए गए हैं जिन्हें स्थायी रूप से विस्थापित के रूप में चिन्हित किया गया है।
इसके बाद मृत मतदाताओं की संख्या है। कुल 16,35,759 मतदाताओं, यानी 2.95 प्रतिशत, की पहचान मृत के रूप में की गई है। इसी तरह 15,65,838 मतदाता, यानी 2.82 प्रतिशत, ऐसे पाए गए जो लापता या अनुपस्थित हैं।
फर्जी या दोहरे पंजीकरण वाले मतदाता
SIR प्रक्रिया के दौरान 6,92,272 मतदाताओं, यानी 1.26 प्रतिशत, की पहचान नकली या पहले से पंजीकृत श्रेणी में की गई है। इस श्रेणी में ऐसे नाम शामिल हो सकते हैं, जिनका रिकॉर्ड किसी अन्य स्थान पर पहले से मौजूद है या जिनकी पहचान को लेकर सत्यापन की आवश्यकता है।
इसके अलावा 4,27,119 मतदाताओं, यानी करीब 0.77 प्रतिशत, को ‘अन्य’ श्रेणी में रखा गया है। इसमें वे लोग शामिल हैं जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन पर हस्ताक्षर करने के इच्छुक नहीं थे या जिनके मामलों में अलग तरह की स्थिति सामने आई।
4.45 करोड़ मतदाताओं ने आवेदन सौंपे
CEO कार्यालय के अनुसार, राज्य के 4,45,18,538 मतदाताओं ने अपने सेंसस एप्लीकेशन पर हस्ताक्षर करके उन्हें BLOs को सौंप दिया है। यह संख्या कुल मतदाताओं का बड़ा हिस्सा है और बताती है कि SIR प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने भाग लिया है।
BLO यानी बूथ लेवल अधिकारी मतदाता सूची के जमीनी स्तर पर सत्यापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे संबंधित क्षेत्र में मतदाताओं से संपर्क कर आवेदन और उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करते हैं। इसके बाद रिकॉर्ड को आगे की चुनावी प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
चुनावी सूची को अपडेट करने की कवायद
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में मौजूद नामों की जांच कई स्तरों पर की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूची में केवल पात्र और वास्तविक मतदाताओं के नाम शामिल रहें। साथ ही जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं, उनके रिकॉर्ड को भी अपडेट किया जा सके।
ASDDO श्रेणी में बड़ी संख्या में मतदाताओं की पहचान होने के बाद अब उनके रिकॉर्ड के सत्यापन और संबंधित दावों एवं आपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। ऐसे मतदाताओं के मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर अंतिम स्थिति तय की जा सकती है।
आगे सत्यापन प्रक्रिया पर नजर
मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेष रूप से मृत, विस्थापित या दोहरे पंजीकरण वाले नामों की पहचान होने के बाद यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर न हो।
CEO कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल SIR प्रक्रिया में आवेदन के डिजिटाइजेशन का चरण पूरा हो चुका है। अब आगे की प्रक्रिया में ASDDO श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के रिकॉर्ड और दावों की जांच अहम भूमिका निभाएगी।
राज्य में कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड से जुड़ी इस व्यापक प्रक्रिया में 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा होना चुनावी सूची के पुनरीक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले चरणों में सत्यापन और दावों-आपत्तियों के निपटारे के बाद मतदाता सूची का संशोधित स्वरूप सामने आने की उम्मीद है।