बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक नई पहल शुरू करने का फैसला किया है। राज्य सरकार जल्द ही ‘100 दिन, 100 स्कूल’ अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और उनके बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की जाएगी।

स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने बुधवार को विधान परिषद में इस अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार कॉर्पोरेट कंपनियों, ट्रस्ट, गैर सरकारी संगठनों (NGO) और चैरिटेबल संस्थाओं के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों के विकास का काम करेगी।

मंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत चयनित 100 सरकारी स्कूलों को 100 दिनों के भीतर बेहतर सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए इच्छुक संस्थाओं के साथ सरकार मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर करेगी।

कांग्रेस एमएलसी विनय कार्तिक प्रकाश के सवाल का जवाब देते हुए मधु बंगारप्पा ने कहा कि जो संगठन अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत सरकारी स्कूलों के विकास में सहयोग करना चाहते हैं, उन्हें स्कूलों के कायाकल्प के लिए 100 दिनों का समय दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल स्कूलों की इमारतों को सुधारना नहीं है, बल्कि शिक्षा के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है। इसके तहत स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर कक्षाएं, डिजिटल संसाधन, स्वच्छता व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि सरकार निजी क्षेत्र की कंपनियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाना चाहती है। CSR के माध्यम से बड़ी कंपनियां पहले भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में योगदान देती रही हैं। अब सरकार इस सहयोग को सरकारी स्कूलों के विकास से जोड़ने की योजना बना रही है।

‘100 दिन, 100 स्कूल’ अभियान के तहत उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जा सकती है जहां बुनियादी सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है। सरकार का लक्ष्य है कि छात्रों को बेहतर पढ़ाई का वातावरण मिले और सरकारी स्कूल निजी स्कूलों की तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस हो सकें।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्रों की पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा। कई बार संसाधनों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कर्नाटक सरकार पहले भी शिक्षा क्षेत्र में कई योजनाएं लागू कर चुकी है। अब निजी क्षेत्र के सहयोग से स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक और निजी भागीदारी (PPP) मॉडल से शिक्षा व्यवस्था में तेजी से सुधार किया जा सकता है।

मधु बंगारप्पा ने कहा कि अभियान के लिए इच्छुक कंपनियों, ट्रस्ट और संगठनों की पहचान की जाएगी। उनके साथ अलग-अलग MoU किए जाएंगे, ताकि स्कूलों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को पूरा किया जा सके।

सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि CSR के तहत मिलने वाली सहायता का सही इस्तेमाल हो और स्कूलों में किए जाने वाले विकास कार्य लंबे समय तक उपयोगी साबित हों। इसके लिए संबंधित विभाग निगरानी व्यवस्था भी तैयार करेगा।

कर्नाटक में बड़ी संख्या में छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। ऐसे में इन स्कूलों की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की उपलब्धता, डिजिटल शिक्षा और सीखने के बेहतर तरीकों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

राज्य सरकार की यह पहल सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अगर अभियान सफल रहता है तो आने वाले समय में अन्य सरकारी स्कूलों को भी इसी मॉडल के तहत विकसित किया जा सकता है।

फिलहाल सरकार निजी कंपनियों और सामाजिक संगठनों के साथ साझेदारी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। ‘100 दिन, 100 स्कूल’ अभियान के जरिए कर्नाटक सरकार सरकारी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने का प्रयास कर रही है।

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