Sarhul Celebrated in Kasmar: कसमार के मंजूरा स्थित नाइया जेहराथान में मंजूरा पंचायत के आदिवासी कुड़मी समाज ने सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया. गांव के नाइया जानकी महतो गुलिआर ने खीर का भोग चढ़ाकर सरना स्थल नाइया जेहराथान में पूजा की. नाइया ने ग्रामीणों के बीच सारइ (सखुआ) फूल का वितरण किया. ग्रामीणों ने बताया कि मंजूरा गांव में चड़क पूजा के उपरांत सरहुल परब मनाने की परंपरा गांव बसने के दौरान से ही चली आ रही है.

Sarhul in Kasmar| कसमार (बोकारो), दीपक सवाल : बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के मंजूरा स्थित नाइया जेहराथान में शुक्रवार को मंजूरा पंचायत के आदिवासी कुड़मी समाज ने सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया. इस दौरान गांव के नाइया जानकी महतो गुलिआर ने खीर का भोग चढ़ाकर सरना स्थल नाइया जेहराथान में पूजा की. इसके बाद ग्रामीणों ने नाया को यहां से झागड़ हाड़ी से सर पर पानी डालते हुए घर तक पहुंचाया, जहां अपने पुरखों के वास स्थल भुतपिढ़ा के समक्ष नाया को बैठाकर गांव की महिलाओं एवं बच्चियों ने नाया को तेल हल्दी लगाया और उनके सिर पर पानी डालकर आशीर्वाद लिया.
चड़क पूजा के बाद सरहुल मनाने की है परंपरा
इस दौरान नाइया ने ग्रामीणों के बीच सारइ (सखुआ) फूल का वितरण किया. ग्रामीणों ने बताया कि मंजूरा गांव में चड़क पूजा के उपरांत सरहुल परब मनाने की परंपरा गांव बसने के दौरान से ही चली आ रही है. नाइया जेहराथान कुड़मी समेत आदिवासियों की गहरी आस्था का केंद्र है. इस परब के माध्यम से भूमिगत जल स्तर का अनुमान एवं भविष्य में होने वाली वर्षा की संभावना का पूर्वानुमान लगाते हैं, जो कि आगामी धान की फसल में काफी लाभदायक होता है.
कांका के लोटा में पानी भरकर 5 दिन तक रखा जाता है
इसके लिए नाइया जेहराथान में सरहुल पूजा के दौरान कांसा के लोटा में पानी भरकर उसे अगले 5 दिनों तक घर में रखा जाता है. 5 दिन के बाद लोटा में मौजूद जल के स्तर से अनुमान लगाया जाता है कि इस वर्ष वर्षा की स्थिति कैसी रहेगी. मौके पर भागीरथ बंसरिआर, सदानंद गुलिआर, मिथिलेश महतो केटिआर, प्रवीण केसरिआर, ज्ञानी गुलिआर, कुलेश्वर केसरिआर, पियूष बंसरिआर, सहदेव झारखंडी, उमेश केसरिआर, अखिलेश केसरिआर, व अन्य मौजूद थे.


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