Jharkhand झारखंड: बरकठा ब्लॉक में स्थित सूर्याकुंड, जिसे एशिया का सबसे गर्म जलाशय माना जाता है, मकर संक्रांति के अवसर पर 15 दिन के भव्य मेले के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मुख्य आकर्षण बन गया है। यह मेला झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा मेला है, पहले स्थान पर देवघर का श्रावणी मेला आता है। सूर्याकुंड मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु स्नान और तर्पण करने आते हैं। मेले में विशेष रूप से झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के लोग भाग लेते हैं।
मकर संक्रांति पर सूर्याकुंड में स्नान करने का महत्व बेहद अधिक माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन सूर्याकुंड में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस अवसर पर मेले में भक्तगण अपने परिवार और दोस्तों के साथ आते हैं और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेते हैं। मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। मेले में स्थानीय कारीगरों और व्यवसायियों के लिए हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। इससे क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।
बरकठा ब्लॉक प्रशासन और पुलिस ने मेले की सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके अलावा, पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई टेंट, शौचालय और खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। सूर्याकुंड मेला झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर करता है। मेले में विभिन्न लोकनृत्य, भजन, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जो ग्रामीण और शहरी पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
इस अवसर पर जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय ने सभी से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और आयोजन का आनंद लें। प्रशासन ने कहा कि मेला न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करता है। इस प्रकार, हज़ारीबाग के सूर्याकुंड में मकर संक्रांति का 15 दिन का मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन बनकर उभरा है, जो प्रदेश के अन्य मेलों के साथ झारखंड की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
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