रांची : जानबूझकर गलत शपथ पत्र दाखिल करने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गढ़वा के उपायुक्त (Garhwa DC) को तलब किया है. इसके साथ ही इस संबंध में ट्रिब्यूनल के समक्ष अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश भी दिया गया है. ट्रिब्यूनल ने डिप्टी कमिश्नर की ओर से दाखिल हलफनामे को झूठा और चौंकाने वाला करार दिया है. वहीं, मामले की सुनवाई 10 अप्रैल 2024 को होनी है. 'भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कृषक समिति' ने एनजीटी (NGT) में याचिका (petition) दाखिल की है. मामला कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य से जुड़ा है. NGTने इस मामले की सुनवाई के लिए 15 फरवरी की तारीख तय की थी.

साथ ही गढ़वा DC को इस मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया तह. NGT के निर्देश के आलोक में 13 फरवरी को उपायुक्त की तरफ से शपथ पत्र दाखिल किया गया. जिसमें कहा गया कि कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य के इको सेंसिटिव जोन के संबंध में 1979 में एक प्रारूप प्रकाशन किया गया था. अभी तक इस मामले में अंतिम प्रकाशन नहीं हो सका है.
NGT ने डिप्टी कमिश्नर के हलफनामे पर हैरानी जताई
बता दें, एनजीटी ने मामले से जुड़े कोर्ट में बताए गए तथ्यों के मद्देनजर डिप्टी कमिश्नर की ओर से दाखिल हलफनामे पर हैरानी जताई है. कोर्ट ने कहा है कि वह डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी द्वारा दाखिल झूठे हलफनामे से हैरान है. DC का हलफनामा कोर्ट रिकार्ड में मौजूद दस्तावेजों के विपरीत है. अदालत के रिकॉर्ड में कैमूर वन्यजीव अभयारण्य इको-सेंसिटिव जोन के संबंध में 13 दिसंबर 2015 को वन पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना शामिल है. इस नोटिफिकेशन में यह भी ज़िक्र किया गया है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 20/7/1979 को जारी अधिसूचना संख्या एसओ 1160 की मदद से कैमूर वन्यजीव अभयारण्य को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम -1972 के अंतर्गत इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था.
उपायुक्त द्वारा तथ्यों की यह अनदेखी चौंकाने वाली है. इस वजह से गढ़वा के DC को न्यायाधिकरण में झूठा शपथ पत्र दाखिल करने के मामले में अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाता है. सिया और गढ़वा के वन विभाग की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा गया. इसके बाद NGT ने पिटीशन पर सुनवाई की डेट 10 अप्रैल तय की है.


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