झारखंड :  राजधानी रांची के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले इस खिलाड़ी की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने खेल जगत और सरकार दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक तरफ उनके जीते हुए मेडल रखे थे तो दूसरी तरफ वह परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सब्जी बेचते नजर आए।
अमरदीप कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने थ्रोबॉल प्रतियोगिताओं में देश के लिए चार गोल्ड मेडल जीते हैं। लेकिन इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद आर्थिक परेशानियों के कारण उन्हें परिवार का खर्च चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
रांची के अरगोड़ा इलाके में अमरदीप अपने परिवार की मदद के लिए सब्जी की दुकान पर काम करते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में वह ग्राहकों को सब्जी तौलते दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि उनके पीछे उनकी खेल उपलब्धियों के मेडल भी नजर आ रहे हैं। यही तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
मेडल जीतने वाले खिलाड़ी की संघर्ष भरी कहानी
अमरदीप ने सीमित संसाधनों के बावजूद खेल में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कड़ी मेहनत और संघर्ष के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। सालों तक देश और राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कई पदक अपने नाम किए।
उनकी उपलब्धियां किसी बड़े खिलाड़ी से कम नहीं हैं, लेकिन खेल करियर के बाद आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलने की वजह से उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग काम करने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमरदीप परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए सब्जी बेचने के साथ निजी वाहन चलाने का काम भी करते हैं।
अमरदीप का कहना है कि उन्होंने सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता के लिए प्रयास किए, लेकिन खेल की मान्यता से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण उन्हें अब तक स्थायी मदद नहीं मिल सकी। थ्रोबॉल को कुछ सरकारी खेल नीतियों में मान्यता नहीं मिलने की वजह से नौकरी प्रक्रिया में अड़चन बताई जा रही है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने उठाए सवाल
अमरदीप की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने खिलाड़ियों के भविष्य और खेल व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने कहा कि जो खिलाड़ी देश के लिए पदक जीतते हैं, उन्हें खेल के बाद सम्मानजनक जीवन और रोजगार की सुविधा मिलनी चाहिए।
लोगों ने सरकार से अपील की कि ऐसे खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें उचित सहायता दी जाए, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक मजबूरी के कारण अपना खेल छोड़ने को मजबूर न हों।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान
अमरदीप की कहानी वायरल होने के बाद झारखंड सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लेते हुए खेल विभाग को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार अब अमरदीप को सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाश रही है।
झारखंड खेल विभाग ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मौजूदा खेल नीति के तहत थ्रोबॉल की मान्यता को लेकर कुछ तकनीकी बाधाएं हैं। इसके बावजूद अमरदीप के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
खिलाड़ियों के सम्मान और भविष्य पर फिर बहस
अमरदीप की कहानी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को करियर खत्म होने के बाद कितनी सुविधाएं मिल पाती हैं।
कई खिलाड़ी आर्थिक परेशानियों के कारण खेल से दूर हो जाते हैं, जबकि उनके पास देश को आगे ले जाने की क्षमता होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों के लिए बेहतर रोजगार नीति, आर्थिक सहायता और खेल के बाद पुनर्वास की व्यवस्था जरूरी है।
अमरदीप की कहानी भले ही संघर्ष से भरी है, लेकिन अब सरकार के हस्तक्षेप के बाद उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है। अगर उन्हें उचित सहायता मिलती है तो वह एक बार फिर अपने खेल और प्रतिभा को आगे बढ़ा सकते हैं।
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