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5.50 लाख ठगे आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे
रामगढ़: अमेरिका से सोना और महंगे कपड़ों का पार्सल भेजने का झांसा देकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर अपराधियों ने पार्सल और कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में करीब 5.50 लाख रुपये की ठगी की। शिकायत मिलने के बाद जांच में जुटी पुलिस ने मामले से जुड़े एक आरोपी को रामगढ़ से गिरफ्तार किया है। यह मामला ऑनलाइन दोस्ती और विदेशी पार्सल के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के तरीके से जुड़ा है। साइबर अपराधी पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और फिर विदेश से कीमती सामान भेजने की बात कहकर अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांगना शुरू कर देते हैं।
अमेरिका से पार्सल भेजने का दिया झांसा
जानकारी के मुताबिक पीड़ित को अमेरिका से सोना और महंगे कपड़ों का पार्सल भेजे जाने का भरोसा दिलाया गया था। बातचीत के दौरान उसे विश्वास दिलाया गया कि उसके नाम पर विदेश से एक कीमती पार्सल भेजा गया है। इसके बाद कथित तौर पर पार्सल भारत पहुंचने और उसे छुड़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के शुल्क जमा करने की बात कही गई। पीड़ित आरोपियों के झांसे में आ गया और पैसे ट्रांसफर करता चला गया।
अलग-अलग बहानों से मांगे पैसे
साइबर अपराधियों ने पार्सल छुड़ाने के लिए कभी कस्टम शुल्क तो कभी अन्य प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर रकम मांगी। शुरुआत में कम रकम मांगकर पीड़ित का भरोसा बनाए रखा गया। इसके बाद धीरे-धीरे रकम बढ़ती गई। जब तक पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ तब तक करीब 5.50 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर किए जा चुके थे। इसके बाद भी जब पार्सल नहीं मिला और लगातार नई रकम की मांग होने लगी तो पीड़ित को शक हुआ।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान बैंक खातों में हुए लेन-देन, मोबाइल नंबर और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया। पैसे जिन खातों में भेजे गए थे, उनसे जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करने लगी।
रामगढ़ से आरोपी गिरफ्तार
तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रामगढ़ में कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि साइबर ठगी के इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी की भूमिका केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने तक सीमित थी या वह पीड़ितों से संपर्क करने और रकम मांगने में भी शामिल था।
बैंक खातों की जांच जारी
साइबर ठगी के मामलों में बैंक खातों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अपराधी अक्सर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देते हैं ताकि पुलिस के लिए पैसों का पता लगाना मुश्किल हो जाए। इस मामले में भी पुलिस संबंधित खातों के ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। इससे यह पता चल सकता है कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई और इससे जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
विदेशी पार्सल के नाम पर लगातार हो रही ठगी
विदेश से महंगे गिफ्ट, सोना, कपड़े या विदेशी मुद्रा भेजने के नाम पर ठगी साइबर अपराध का जाना-पहचाना तरीका बन चुका है। अपराधी सोशल मीडिया या दूसरे ऑनलाइन माध्यम से संपर्क कर दोस्ती करते हैं। कुछ समय तक बातचीत करने के बाद विदेश से कीमती उपहार भेजने की बात कही जाती है।इसके बाद पीड़ित को कथित कस्टम अधिकारी या कुरियर कर्मचारी बनकर फोन किया जाता है और पार्सल छुड़ाने के लिए टैक्स या क्लीयरेंस फीस जमा करने को कहा जाता है।एक बार भुगतान करने के बाद अलग-अलग बहानों से लगातार नई रकम मांगी जाती है।
अनजान व्यक्ति के कहने पर न भेजें पैसे
पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को इस तरह की धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह देती हैं। किसी अनजान व्यक्ति की ओर से विदेश से महंगा उपहार या पार्सल भेजने का दावा किए जाने पर उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। कस्टम शुल्क या पार्सल क्लीयरेंस के नाम पर किसी निजी बैंक खाते में रकम भेजने से बचना चाहिए। संदिग्ध फोन कॉल, मैसेज या लिंक मिलने पर व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो जल्द से जल्द बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देना जरूरी है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को बैंकिंग सिस्टम में रोकने की संभावना बढ़ सकती है। ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच के आधार पर मामले में अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
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