जामताड़ा में फर्जी SIM कार्ड गिरोह का खुलासा, साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे थे दूसरे राज्यों के सिम

Update: 2026-05-12 16:02 GMT

Jamtara, जामताड़ा: झारखंड का जामताड़ा एक बार फिर साइबर अपराध से जुड़े बड़े नेटवर्क को लेकर चर्चा में है। इस बार पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी सिम कार्ड तैयार कर साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार यह गिरोह दूसरे राज्यों से सिम कार्ड मंगवाकर जामताड़ा और आसपास सक्रिय साइबर अपराधियों को सप्लाई करता था। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपी की पहचान यासमुद्दीन अंसारी शेख के रूप में हुई है। वह देवघर जिले के पलोजोरी थाना क्षेत्र के नवाडीह गांव का निवासी बताया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से साइबर अपराधियों के संपर्क में था और उनके लिए फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह मजदूरों और बेरोजगार लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने दूसरे राज्यों में ले जाता था। वहां उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी कराए जाते थे।

पुलिस के अनुसार अगस्त 2023 में बिंदपाथर थाना क्षेत्र में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। उस समय से वह फरार चल रहा था। हाल ही में पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी इलाके में पहुंचा है। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं।

जांच में पता चला कि आरोपी लोगों को रोजगार दिलाने के नाम पर ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में ले जाता था। वहां पहुंचने के बाद उनके जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेता था। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न निजी कंपनियों के सिम कार्ड जारी कराए जाते थे। बाद में इन्हें साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था। इन्हीं सिम कार्डों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, बैंक फ्रॉड, फर्जी कॉल और डिजिटल धोखाधड़ी में किया जाता था।

पुलिस का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी ने अब तक कितने फर्जी सिम कार्ड जारी करवाए और कितने साइबर अपराधियों तक पहुंचाए। फिलहाल पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से जुड़े और कौन-कौन लोग अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हैं।

जामताड़ा पुलिस लगातार साइबर अपराध के खिलाफ अभियान चला रही है। इसके बावजूद साइबर ठगी की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुक पा रही हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। इन्हीं नंबरों के जरिए अपराधी अपनी पहचान छिपाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं।

जामताड़ा के एसपी Shambhu Kumar Singh ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। एसपी के अनुसार ओडिशा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के सिम कार्ड साइबर अपराध में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई निजी कंपनियों के सिम कार्ड जब्त किए गए हैं और उनके स्रोत की जांच की जा रही है।

एसपी ने कहा कि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साइबर अपराधियों तक सिम कार्ड पहुंचाने वाले और कितने नेटवर्क सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच के जरिए पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा। साथ ही साइबर अपराधियों से जुड़े आर्थिक लेन-देन की भी जांच हो रही है।

मामले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। जामताड़ा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता Mohanlal Barman ने कहा कि साइबर अपराध रोकने के लिए केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि फर्जी सिम कार्डों की जांच और निगरानी में अभी भी कई कमजोरियां हैं, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं।

उनका कहना है कि साइबर अपराधियों से जब्त किए गए सिम कार्डों की पूरी तकनीकी जांच नहीं हो पाती। कई मामलों में आरोपी कुछ महीनों बाद जमानत पर बाहर आ जाते हैं और फिर से इसी काम में लग जाते हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गया है। यह अंतरराज्यीय और संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। फर्जी दस्तावेज, बैंक खाते और मोबाइल सिम के जरिए अपराधी देशभर में लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस, टेलीकॉम कंपनियों और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

जामताड़ा लंबे समय से साइबर ठगी के मामलों को लेकर देशभर में चर्चा में रहा है। यहां सक्रिय गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को झांसे में लेकर बैंक खातों से रकम निकालते हैं। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद नए-नए तरीके अपनाकर अपराधी लगातार नेटवर्क फैलाने में लगे हैं। अब फर्जी सिम कार्ड सप्लाई का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों और संपर्कों की जांच की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर अपराध के इस बड़े नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।

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