धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के निरसा क्षेत्र में कुत्तों के हमले और रेबीज से जुड़ी घटनाओं ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक महीने के भीतर कुत्ते के काटने के बाद चार लोगों की मौत की बात सामने आई है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण प्रभावित गांवों के लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

निरसा क्षेत्र में कुत्तों के हमले का मामला जुलाई में उस समय गंभीर रूप से सामने आया था, जब अलग-अलग गांवों में एक कथित पागल आवारा कुत्ते ने बड़ी संख्या में लोगों को काट लिया था। 18 जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 25 से 30 लोगों को काटे जाने की बात सामने आई थी। प्रभावित क्षेत्रों में रांगामटिया, डांगासाल, बरडांग, बस्ताबाड़ी, सिंदरी कॉलोनी, भालखोरिया, कुसुमकनाली, चापापुर, उदयपुर और बेलटिकरी समेत कई गांव शामिल थे। एक अन्य रिपोर्ट में निरसा के आधा दर्जन गांवों में करीब 18 से 20 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। इनमें गंभीर श्रेणी के डॉग बाइट के मरीज भी शामिल थे और दो घायलों को बेहतर उपचार के लिए रांची के रिम्स रेफर किया गया था। कई अन्य लोगों का इलाज धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल और निरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया।
इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में इतना भय था कि कई लोग रात में लाठी-डंडे लेकर निगरानी करने लगे थे। आवारा कुत्तों को गांव से दूर रखने के साथ आसपास के गांवों के लोगों को भी सतर्क किया गया। कुत्ते को पकड़ने के लिए रेस्क्यू टीम को भी लगाया गया था।
अब एक महीने के भीतर चार मौतों की खबर ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए प्रशासन को स्थायी और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की पहचान, पकड़ने की व्यवस्था और रेबीज से बचाव के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। पहले सामने आई घटनाओं के दौरान निरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर भी नाराजगी सामने आई थी। जुलाई में कुछ घायलों को वैक्सीन के लिए धनबाद भेजना पड़ा था। स्थानीय स्तर पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरी इम्युनोग्लोब्युलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
रेबीज बेहद गंभीर बीमारी है। कुत्ते या किसी संदिग्ध जानवर के काटने अथवा खरोंचने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और बिना देरी चिकित्सा केंद्र पहुंचना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज टीकाकरण और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार लेना जरूरी होता है।
निरसा की घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत भी सामने आई है। कई बार लोग कुत्ते के छोटे घाव या खरोंच को सामान्य समझकर उपचार में देरी कर देते हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही गंभीर साबित हो सकती है। फिलहाल लगातार सामने आ रही घटनाओं से निरसा के कई गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीण प्रशासन से आवारा और संदिग्ध कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाने के साथ स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। चार मौतों की रिपोर्ट के बाद यह मामला अब केवल आवारा कुत्तों की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती बन गया है।
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