पोटका। झारखंड के पोटका प्रखंड के नारदा गांव में बीमारी और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण एक 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। मृतका की पहचान अनीता सरदार के रूप में हुई है। वहीं, उसका 5 वर्षीय छोटा भाई अजय सरदार भी ब्रेन मलेरिया की चपेट में आ गया है। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया है।
जानकारी के अनुसार, नारदा गांव निवासी अनीता सरदार की मंगलवार शाम तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी हालत गंभीर होती चली गई। घटना की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हुई और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुकांत सीट गांव पहुंचे।
डॉ. सुकांत सीट ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बच्ची के पिता कोंदा सरदार ने अनीता की तबीयत खराब होने के बाद समय पर जांच और इलाज नहीं कराया, जिसके कारण उसकी स्थिति बिगड़ गई और उसकी जान चली गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गांव में पहले ही मलेरिया जांच अभियान चलाया गया था। 7, 8 और 9 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नारदा गांव में विशेष जांच अभियान चलाया था। इस दौरान गांव के लोगों की जांच की गई थी और कोई भी व्यक्ति मलेरिया पॉजिटिव नहीं पाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि अनीता सरदार उस समय गांव में मौजूद नहीं थी। वह अपने ननिहाल डुमरिया गई हुई थी, जिसके कारण 9 जुलाई को उसकी मलेरिया जांच नहीं हो सकी थी। वहीं, उसके छोटे भाई अजय सरदार और परिवार के अन्य सदस्यों की जांच उस समय की गई थी, जिसमें सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी।
बाद में अजय सरदार की तबीयत खराब हुई और जांच में उसके ब्रेन मलेरिया से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। ब्रेन मलेरिया को मलेरिया का गंभीर रूप माना जाता है, जिसमें मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चे को तत्काल बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल भेजा है, जहां उसका इलाज जारी है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य कर्मियों को गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करने और बुखार से पीड़ित लोगों की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की टीम ने ग्रामीणों से अपील की है कि मलेरिया के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतें।
डॉ. सुकांत सीट ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना, कंपकंपी या कमजोरी जैसे लक्षण मलेरिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मलेरिया की जांच और इलाज की सुविधा मुफ्त उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का पूरा कोर्स जरूर पूरा करें। अधूरा इलाज करने या बीमारी को नजरअंदाज करने से स्थिति गंभीर हो सकती है।
पोटका की इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण अभियान को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज मिलने से मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।