हजारीबाग: झारखंड में JPSC परीक्षा रद्द होने के फैसले का असर सिर्फ अभ्यर्थियों पर ही नहीं बल्कि उन परिवारों पर भी पड़ा है, जिन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। हजारीबाग के एक पिता की कहानी इसी दर्द को बयां करती है, जिन्होंने गाय पालकर और कड़ी मेहनत कर अपने बेटे को अफसर बनाने का सपना देखा था।
पिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने पशुपालन का सहारा लिया और गाय पालकर होने वाली आमदनी से बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। उनका सपना था कि बेटा JPSC परीक्षा पास कर सरकारी अधिकारी बनेगा और परिवार की स्थिति बदलेगा।
लेकिन JPSC परीक्षा रद्द होने की खबर ने परिवार की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। वर्षों की मेहनत, तैयारी और इंतजार के बाद जब परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए तो पिता की आंखों में निराशा साफ दिखाई दी।
परिवार का कहना है कि बेटे ने दिन-रात मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी। उन्हें उम्मीद थी कि मेहनत का फल मिलेगा और घर की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। लेकिन परीक्षा रद्द होने से अब आगे की राह को लेकर चिंता बढ़ गई है।
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से छात्रों का आंदोलन चल रहा था। छात्रों की मांगों और सरकार के फैसलों के बाद कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव और रद्द होने से उनका समय और मेहनत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी क्षमता लगा दी, लेकिन व्यवस्था की खामियों का असर परिवारों पर पड़ रहा है।
हजारीबाग के इस पिता की कहानी उन हजारों परिवारों की भावनाओं को दर्शाती है, जो अपने बच्चों की सफलता के लिए वर्षों तक संघर्ष करते हैं। अब उनकी उम्मीदें दोबारा होने वाली निष्पक्ष परीक्षा और बेहतर व्यवस्था पर टिकी हैं।
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