पटना/रांची। रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से किए गए हमले की जांच अब बिहार की राजधानी पटना तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को पटना में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कंकड़बाग मेन रोड स्थित साईं कुसुम इनफिनिटी अपार्टमेंट के दो फ्लैटों में छापेमारी की। कार्रवाई दस घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान जांच एजेंसी की टीम ने कई दस्तावेजों और अन्य संदिग्ध सामग्री की तलाशी ली।

छापेमारी के दौरान लाखों रुपये की नकदी और जेवरात बरामद होने की भी सूचना सामने आई है। हालांकि, इन बरामदगी को लेकर एनआईए की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद इस मामले के तार पटना से जुड़ने की आशंका को बल मिला है। एजेंसी अब हमले की साजिश, आरोपियों के नेटवर्क और उनके संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है।

दस घंटे से अधिक चली कार्रवाई

एनआईए की टीम बुधवार को कंकड़बाग मेन रोड स्थित साईं कुसुम इनफिनिटी अपार्टमेंट पहुंची और वहां दो फ्लैटों में तलाशी अभियान शुरू किया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। एजेंसी के अधिकारियों ने फ्लैटों के भीतर दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की।

बताया जा रहा है कि दोनों फ्लैटों में लंबे समय तक तलाशी चली। जांच टीम ने कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। इसके अलावा नकदी और आभूषण मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, बरामद सामान का वास्तविक स्वरूप और उसकी कुल कीमत एनआईए की ओर से आधिकारिक तौर पर नहीं बताई गई है।

जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छापेमारी में वास्तव में क्या-क्या बरामद हुआ और उसका आरएसएस कार्यालय पर हुए हमले से क्या संबंध है।

रांची हमले की जांच का दायरा बढ़ा

रांची स्थित आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमले के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर एजेंसियों को कुछ ऐसे सुराग मिलने की संभावना है, जिनके आधार पर जांच का दायरा दूसरे राज्यों तक बढ़ाया गया है।

पटना में एनआईए की कार्रवाई को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमले में शामिल लोगों को किसी बाहरी नेटवर्क से मदद मिली थी या नहीं। इसके अलावा हमले की योजना बनाने, संसाधन जुटाने और घटना को अंजाम देने में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

फ्लैटों में मिले दस्तावेजों की जांच

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इन दस्तावेजों का संबंध किन लोगों या संगठनों से है। यदि दस्तावेजों में किसी तरह के वित्तीय लेनदेन, संपर्क या यात्रा से जुड़ी जानकारी मिलती है तो जांच की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखती हैं। फ्लैटों से यदि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य डिजिटल सामग्री मिली है तो उसकी फोरेंसिक जांच भी की जा सकती है। इससे हमले से जुड़े संभावित संपर्कों और संचार के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद हो सकती है।

नकदी और जेवरात की सूचना, आधिकारिक पुष्टि नहीं

छापेमारी के बाद सामने आई जानकारी में लाखों रुपये की नकदी और जेवरात मिलने का दावा किया जा रहा है। हालांकि एनआईए ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसलिए बरामदगी की रकम, जेवरात की मात्रा और उनके स्रोत को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक जानकारी साझा किए जाने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि बरामद नकदी और अन्य सामान का मामले से कोई सीधा संबंध है या नहीं। जांच के दौरान एजेंसी बरामद सामग्री के स्रोत और उसके संभावित इस्तेमाल की भी पड़ताल कर सकती है।

साजिश और नेटवर्क की तलाश

आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम हमला एक संवेदनशील मामला माना जा रहा है। ऐसे में एनआईए की जांच केवल घटना को अंजाम देने वालों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि साजिश के पीछे मौजूद संभावित नेटवर्क और मददगारों तक पहुंचने की दिशा में भी आगे बढ़ सकती है।

पटना में छापेमारी से संकेत मिल रहा है कि एजेंसी हमले के पीछे संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि क्या हमले की योजना किसी दूसरे स्थान पर बनाई गई थी और क्या आरोपियों को पटना से किसी प्रकार की आर्थिक, तकनीकी या अन्य सहायता मिली थी।

आगे और कार्रवाई की संभावना

एनआईए की कार्रवाई के बाद मामले में आगे भी छापेमारी और पूछताछ की संभावना बनी हुई है। एजेंसी बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री का विश्लेषण करने के बाद संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर सकती है। जरूरत पड़ने पर अन्य ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया जा सकता है।

फिलहाल पटना में दस घंटे से अधिक चली छापेमारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। रांची के आरएसएस कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच अब पटना तक पहुंच चुकी है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि पटना के दोनों फ्लैटों से मिले सामान का हमले से सीधा संबंध है। एनआईए की आधिकारिक रिपोर्ट और आगे की जांच से ही तस्वीर साफ होगी।

जांच एजेंसी की कार्रवाई से इतना जरूर संकेत मिलता है कि हमले के पीछे संभावित नेटवर्क की तलाश में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब निगाहें एनआईए की अगली कार्रवाई और बरामद दस्तावेजों से सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।

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