निजी अस्पतालों में भी सक्रिय हुआ मरीजों को लाने वाला दलाल नेटवर्क

Update: 2026-07-25 06:17 GMT

रांची : मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने का खेल अब केवल सरकारी अस्पतालों के गेट पर खड़े दलालों या निजी एंबुलेंस संचालकों तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह नेटवर्क पहले से कहीं अधिक संगठित और व्यापक रूप ले चुका है। स्थिति यह है कि यदि कोई मरीज अपनी इच्छा से किसी निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचता है, तब भी दलालों की नजर उस पर बनी रहती है। अस्पताल पहुंचने के बाद भी मरीज और उसके परिजनों को प्रभावित करने, अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाने और कमीशन की मांग करने जैसे मामले सामने आने लगे हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए सक्रिय यह नेटवर्क अब कई स्तरों पर काम कर रहा है। पहले जहां सरकारी अस्पतालों के बाहर मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों में बेहतर इलाज का झांसा देकर भेजा जाता था, वहीं अब कुछ दलाल निजी अस्पतालों के अंदर तक पहुंच बना चुके हैं। वे मरीजों की स्थिति, इलाज की जरूरत और आर्थिक क्षमता को देखकर अपना फायदा तलाशते हैं।

मरीजों को गुमराह करने से लेकर अस्पतालों पर दबाव तक

इस तरह के नेटवर्क का सबसे बड़ा निशाना आमतौर पर गंभीर मरीज और उनके परिजन होते हैं। बीमारी की गंभीर स्थिति में परिजन जल्दी और बेहतर इलाज की तलाश में रहते हैं। ऐसे समय में दलाल उन्हें अलग-अलग अस्पतालों की सुविधाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और इलाज की गुणवत्ता को लेकर भ्रमित कर सकते हैं।

कई बार मरीजों को यह कहकर दूसरे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया जाता है कि वहां कम खर्च में बेहतर इलाज मिलेगा या अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं। लेकिन इसके पीछे कई बार कमीशन आधारित व्यवस्था काम करती है। मरीज के दूसरे अस्पताल में भर्ती होने के बाद दलालों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।

इतना ही नहीं, कुछ मामलों में दलाल अस्पताल प्रबंधन या डॉक्टरों से भी संपर्क कर मरीज रेफर करने के बदले कमीशन की मांग करते हैं। जब अस्पताल प्रबंधन ऐसे दबाव को स्वीकार नहीं करता, तो मरीजों को वहां से हटाने या अस्पताल की छवि खराब करने जैसी कोशिशें भी की जाती हैं।

निजी अस्पतालों के लिए भी चुनौती बना नेटवर्क

आम धारणा यह रही है कि दलाल केवल सरकारी अस्पतालों के आसपास सक्रिय रहते हैं, लेकिन अब निजी अस्पताल भी इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि बाहरी लोगों द्वारा मरीजों को प्रभावित करने की कोशिश से स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।

कई अस्पताल प्रबंधन ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रहे हैं। अस्पताल परिसर में अनधिकृत लोगों की आवाजाही रोकने, मरीजों से सीधे फीडबैक लेने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि इलाज की प्रक्रिया में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ता है, तो इसका सीधा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ सकता है। कई बार गलत जानकारी के आधार पर मरीज का अस्पताल बदलना इलाज में देरी का कारण बन सकता है।

कमीशन की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के बदले कमीशन लेने की व्यवस्था लंबे समय से विवादों में रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इलाज जैसी संवेदनशील सेवा में किसी भी तरह का अनुचित आर्थिक दबाव मरीजों के हितों के खिलाफ है।

कमीशन आधारित रेफरल व्यवस्था से इलाज का खर्च भी प्रभावित हो सकता है। यदि किसी मरीज को केवल आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किसी अस्पताल या जांच केंद्र तक पहुंचाया जाता है, तो इससे चिकित्सा नैतिकता पर सवाल उठते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति की सलाह पर तुरंत अस्पताल बदलने के बजाय डॉक्टरों की राय, अस्पताल की सुविधाओं और इलाज से संबंधित वास्तविक जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका अहम

इस बढ़ते नेटवर्क पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अस्पताल परिसरों में दलालों की पहचान, शिकायतों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय, मरीजों के अधिकारों के प्रति जागरूकता और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने से इस समस्या पर अंकुश लगाया जा सकता है।

मरीजों की मजबूरी और बीमारी की स्थिति का फायदा उठाने वाले इस नेटवर्क को रोकना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। अब जरूरत है कि अस्पतालों, प्रशासन और आम लोगों के बीच बेहतर तालमेल बने, ताकि इलाज के नाम पर होने वाले किसी भी तरह के शोषण को रोका जा सके।

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