Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हाल ही में आयोजित शून्यकाल सत्र में विधायकों ने प्रमुख सार्वजनिक मुद्दों को उठाया और सरकार से जवाब मांगे। यह सत्र नागरिकों की समस्याओं, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोजित किया गया था। शून्यकाल में कई विधायकों ने स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता दी। इनमें सड़क और परिवहन की खराब स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा संस्थानों में अव्यवस्था और जल आपूर्ति की समस्याएं शामिल थीं। सदन में सवाल-जवाब के दौरान सरकार को इन मुद्दों पर विस्तार से जवाब देना पड़ा।
एक विधायक ने कहा कि कई क्षेत्रों में सड़क और पुलों की स्थिति खराब है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जल्द से जल्द मरम्मत और रखरखाव कार्य शुरू किया जाए।
स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा के दौरान विधायकों ने अस्पतालों में दवाइयों और सुविधाओं की कमी, स्कूलों में शिक्षक-शिक्षिका की अनुपस्थिति और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। सदन में उपस्थित स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारी ने स्थिति सुधारने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
जल आपूर्ति और पीने के पानी की समस्या पर भी बहस हुई। कई विधायकों ने ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकारी योजनाओं की समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। सरकार ने जल आपूर्ति सुधारने के लिए नई योजनाओं और मॉनिटरिंग तंत्र की जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों का कहना है कि शून्यकाल सत्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि यह विधायकों को सीधे जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने का मौका देता है। उन्होंने बताया कि इससे नीति निर्माण और स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है।
स्थानीय नागरिकों ने शून्यकाल के दौरान उठाए गए मुद्दों का स्वागत किया और कहा कि विधायकों द्वारा सीधे सवाल उठाने से प्रशासन और सरकार को जनता की समस्याओं पर ध्यान देने का संदेश मिलता है।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शून्यकाल सत्र में विधायकों ने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को प्रमुखता दी। सरकार ने सदन में विस्तृत जवाब दिया और सुधारात्मक उपायों का आश्वासन दिया। यह सत्र जनता और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत करने और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ।