Jammu जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हांगू झील क्षेत्र को लेकर विशेषज्ञों ने संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है। जम्मू विश्वविद्यालय के रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अवतार सिंह जसरोतिया ने कहा है कि यदि हांगू झील का पुल प्रभावित होता है तो इसका असर आसपास की कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ सकता है। प्रोफेसर जसरोतिया ने बताया कि हांगू झील पुल को नुकसान पहुंचने की स्थिति में कश्मीर क्षेत्र में स्थित कई बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। इनमें खैबर, खेरू, तुलहस्ती, बगलिहार और सलाल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि संभावित प्रभाव वाला क्षेत्र सबसे पहले गुलाबगढ़ हो सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र हांगू झील के समान स्तर पर स्थित है। ऐसे में किसी भी बड़ी प्राकृतिक या भौगोलिक हलचल का असर सबसे पहले इसी इलाके में देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे मामलों में समय रहते निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी है। रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के जरिए भौगोलिक बदलावों पर नजर रखी जा सकती है और संभावित खतरों का पहले अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित जलाशय, झीलें और बड़े बांध परियोजनाएं प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी, सुरक्षा जांच और आपदा प्रबंधन की तैयारी आवश्यक है।
जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं नदियों और पहाड़ी क्षेत्रों पर आधारित हैं। इन परियोजनाओं से बिजली उत्पादन के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े भौगोलिक बदलाव का असर केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के क्षेत्रों, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। प्रोफेसर जसरोतिया ने संभावित खतरे को देखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से प्राकृतिक घटनाओं के प्रभाव को समझने और नुकसान को कम करने के प्रयास किए जा सकते हैं। फिलहाल हांगू झील और उससे जुड़े क्षेत्रों को लेकर विशेषज्ञों की टिप्पणियों के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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