नई दिल्ली/लेह। लद्दाख के राजनीतिक भविष्य और वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का नया दौर 9 सितंबर को नई दिल्ली में शुरू होगा। केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय की उप-समिति ने बैठक की तारीख तय कर दी है। यह बैठक पिछली बातचीत के करीब तीन सप्ताह बाद होने जा रही है। ऐसे में इसे लद्दाख की राजनीतिक मांगों पर आगे की दिशा तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय (MHA) की उप-समिति की बैठक 9 सितंबर को निर्धारित की गई है। उन्होंने इसे लद्दाख में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए चल रही बातचीत का हिस्सा बताया। केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली इस वार्ता में क्षेत्र की राजनीतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक मांगों पर आगे चर्चा होने की संभावना है।

पिछली बैठक में नहीं बनी थी सहमति

लद्दाख को लेकर केंद्र और क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक-सामाजिक समूहों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है। केंद्र शासित प्रदेश के दो प्रमुख समूह—लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA)—लद्दाख के लिए एक मजबूत राजनीतिक ढांचे की मांग कर रहे हैं।

पिछली बैठक में दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी, लेकिन राजनीतिक ढांचे को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। खासतौर पर लद्दाख के लिए निर्वाचित विधानसभा और व्यापक राजनीतिक अधिकारों की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। अब तीन सप्ताह बाद होने वाली नई बैठक में इन विषयों पर आगे की बातचीत होने की उम्मीद है।

LAB और KDA का कहना है कि वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव तो हुआ, लेकिन क्षेत्र के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। दोनों संगठन चाहते हैं कि लद्दाख के लोगों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका मिले।

निर्वाचित विधानसभा की प्रमुख मांग

लद्दाख के प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों में केंद्र शासित प्रदेश में निर्वाचित विधानसभा की स्थापना शामिल है। उनका तर्क है कि विधानसभा के माध्यम से स्थानीय लोगों को कानून बनाने और क्षेत्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रत्यक्ष भागीदारी मिलेगी।

इसके अलावा वित्तीय अधिकारों को मजबूत करने की मांग भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय प्रतिनिधियों का मानना है कि लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियां, सीमावर्ती स्थिति और विकास की विशेष जरूरतों को देखते हुए क्षेत्र को वित्तीय संसाधनों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण मिलना चाहिए।

कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकार भी एजेंडे में

LAB और KDA की मांगों में कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। प्रतिनिधि चाहते हैं कि स्थानीय स्तर पर प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्वाचित संस्थाओं की भूमिका अधिक प्रभावी हो।

लद्दाख की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। विशाल पर्वतीय क्षेत्र, सीमावर्ती इलाकों और कठोर मौसम के कारण यहां प्रशासनिक चुनौतियां भी अलग तरह की हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में अधिक अधिकार देने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

संविधान की छठी अनुसूची की मांग का मुद्दा

लद्दाख के राजनीतिक संगठनों की मांगों में क्षेत्र की पहचान, भूमि और सांस्कृतिक हितों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी शामिल रहे हैं। इन मांगों के केंद्र में स्थानीय समुदायों को अपनी भूमि, संस्कृति और संसाधनों की सुरक्षा के लिए संस्थागत अधिकार उपलब्ध कराना है।

लद्दाख को विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। स्थानीय संगठनों का मानना है कि क्षेत्र की विशिष्ट जनजातीय और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए ऐसा ढांचा जरूरी है, जिससे बाहरी दबावों के बीच स्थानीय हित सुरक्षित रह सकें।

केंद्र के लिए भी अहम है संवाद

9 सितंबर की बैठक केंद्र सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लद्दाख में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक अधिकारों को लेकर लंबे समय से उठ रही मांगों के बीच केंद्र बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। बैठक में दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस प्रस्ताव या राजनीतिक ढांचे की दिशा में प्रगति होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

केंद्र की ओर से बातचीत को जारी रखना इस बात का संकेत है कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों को संवाद के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, पिछली बैठक में सहमति नहीं बनने के कारण इस बार भी बातचीत चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है।

लेह और कारगिल दोनों की भागीदारी महत्वपूर्ण

लद्दाख के मामले में लेह और कारगिल दोनों क्षेत्रों की राजनीतिक आकांक्षाओं को साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण माना जाता है। LAB मुख्य रूप से लेह क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि KDA कारगिल की राजनीतिक और सामाजिक आवाज को सामने रखता है। दोनों संगठनों की कुछ मांगें समान हैं, जबकि क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण कुछ मुद्दों पर प्राथमिकताएं अलग भी हो सकती हैं।

ऐसे में 9 सितंबर की बैठक केवल केंद्र और लद्दाख के बीच बातचीत नहीं होगी, बल्कि यह इस बात की परीक्षा भी होगी कि दोनों प्रमुख क्षेत्रीय समूह अपनी मांगों को किस तरह एक साझा राजनीतिक ढांचे में प्रस्तुत करते हैं।

फिलहाल केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। 9 सितंबर की बैठक में विधानसभा, वित्तीय अधिकार, कानून-व्यवस्था और स्थानीय पहचान से जुड़े मुद्दों पर आगे की चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि लद्दाख के राजनीतिक भविष्य को लेकर केंद्र किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। बैठक के नतीजों को क्षेत्र में लोकतांत्रिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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