जम्मू-कश्मीर : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों में अपनी मांगों को लेकर एकजुटता की कमी सामने आई है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अब वे दो अलग-अलग संगठनों में बंट गए हैं।

दोनों संगठनों ने अपनी-अपनी रणनीति के तहत हड़ताल का ऐलान किया है। एक संगठन ने 9 सितंबर से तो दूसरे संगठन ने 18 सितंबर से 72 घंटे की केंद्र शासित प्रदेशव्यापी हड़ताल करने की घोषणा की है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

NHM कर्मचारी लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि, सभी कर्मचारियों को नियमित करना, बेहतर सेवा शर्तें लागू करना और तबादला नीति तैयार करना शामिल है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।

दो संगठनों में बंटे कर्मचारी

NHM कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर अब दो अलग-अलग गुट सामने आ गए हैं।

जम्मू संभाग में मजबूत पकड़ रखने वाली नेशनल हेल्थ इंप्लाइज एसोसिएशन ने रविवार को पत्रकार वार्ता कर अपनी रणनीति की जानकारी दी।

एसोसिएशन के प्रधान रोहित सेठ ने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी जायज मांगों के समाधान के लिए लोकतांत्रिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखी गईं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिल सका।

9 सितंबर से हड़ताल का ऐलान

एक संगठन ने अपनी मांगों को लेकर 9 सितंबर से 72 घंटे की केंद्र शासित प्रदेशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।

संगठन का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

दूसरे संगठन ने 18 सितंबर तय की तारीख

वहीं, दूसरे संगठन ने 18 सितंबर से 72 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है।

अलग-अलग तारीखों पर हड़ताल की घोषणा होने से कर्मचारियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, दोनों संगठनों का उद्देश्य अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

NHM कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े होते हैं।

इनमें ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पतालों में सहायता, स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन और मरीजों से जुड़ी कई जिम्मेदारियां शामिल हैं।

यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार से बातचीत की उम्मीद

कर्मचारियों का कहना है कि वे बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं।

उनका उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं बल्कि अपनी लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।

वहीं, अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के रुख पर है कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

आगे की रणनीति पर नजर

NHM कर्मचारियों के दोनों संगठनों की अलग-अलग घोषणाओं के बाद आंदोलन की दिशा पर सबकी नजर बनी हुई है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।

अब यह देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।

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