श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत क्षमता बढ़ाने की दिशा में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स के बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर समेत हिमालयी राज्यों को ग्लेशियर से आने वाली बाढ़, हिमस्खलन और पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े अन्य प्राकृतिक खतरों से निपटने के लिए तैयारियां बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जलवायु जोखिम और प्राकृतिक आपदाओं की संभावना को देखते हुए सरकार ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं के साथ-साथ आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है।

जम्मू-कश्मीर में चल रहे चार बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट

जम्मू-कश्मीर इस समय अपनी जलविद्युत क्षमता बढ़ाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

इनमें पाकल दुल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (1000 मेगावाट), रातले हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (850 मेगावाट), किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (624 मेगावाट) और क्वार हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (540 मेगावाट) शामिल हैं।

इन चारों परियोजनाओं की कुल क्षमता 3,014 मेगावाट है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।

प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा पर फोकस

हिमालयी क्षेत्रों में बड़े बांध और हाइड्रोपावर परियोजनाओं के निर्माण के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।

ग्लेशियर झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ (GLOF), अचानक बर्फीले तूफान, हिमस्खलन और भूस्खलन जैसी घटनाएं इन क्षेत्रों में चुनौती बन सकती हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

परियोजनाओं की सुरक्षा होगी प्राथमिकता

सरकार का उद्देश्य है कि विकास परियोजनाओं के साथ सुरक्षा मानकों को भी मजबूत किया जाए।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के आसपास निगरानी व्यवस्था, मौसम की जानकारी जुटाने वाले सिस्टम और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय और भूगर्भीय जोखिमों को ध्यान में रखना जरूरी है।

जलविद्युत क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की अहम भूमिका

जम्मू-कश्मीर में नदियों और पहाड़ी भूभाग के कारण जलविद्युत उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं।

सरकार लंबे समय से यहां बिजली उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रही है, ताकि स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।

इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

हिमालयी राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश

केंद्र सरकार ने केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि सभी हिमालयी राज्यों को प्राकृतिक आपदाओं को लेकर सतर्क रहने को कहा है।

इन क्षेत्रों में बदलते मौसम के पैटर्न और बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों पर असर पड़ रहा है।

ऐसे में समय रहते चेतावनी प्रणाली और राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।

आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।

इसमें सैटेलाइट निगरानी, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, जल स्तर की निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली जैसे उपाय शामिल हैं।

इन तकनीकों की मदद से आपदा आने से पहले लोगों को सतर्क किया जा सकता है और नुकसान को कम किया जा सकता है।

विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोपावर परियोजनाएं देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विकास कार्यों के साथ आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी प्राकृतिक चुनौती का प्रभाव कम किया जा सके।

आने वाले समय में बढ़ेगी निगरानी

जम्मू-कश्मीर में हाइड्रोपावर परियोजनाओं के विस्तार के साथ सुरक्षा निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि ऊर्जा विकास और प्राकृतिक सुरक्षा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।

हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए यह कदम भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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