जम्मू : जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार में कांग्रेस की भागीदारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। गठबंधन सहयोगी होने के बावजूद कांग्रेस अब तक सरकार में शामिल नहीं हुई है। वहीं, सरकार में एक मंत्री पद खाली रखा गया है, लेकिन इस एक पद के लिए पार्टी के भीतर कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए सरकार में शामिल होने का फैसला आसान नहीं दिख रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंत्री पद के लिए सही चेहरे का चयन करना है। पार्टी में कई वरिष्ठ नेता इस पद के दावेदार माने जा रहे हैं। इनमें जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी दोनों क्षेत्रों के नेताओं के नाम चर्चा में हैं। एक पद और कई दावेदारों की वजह से अंदरूनी संतुलन साधना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
राज्य का दर्जा बहाली बना मुख्य मुद्दा
कांग्रेस ने शुरुआत से ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिए जाने की मांग को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा है। पार्टी का कहना रहा है कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होता, तब तक सरकार में शामिल होने पर फैसला करना मुश्किल होगा। इसी वजह से कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला सरकार को बाहर से समर्थन देने का विकल्प चुना था। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था में मुख्यमंत्री और निर्वाचित सरकार के अधिकार सीमित हैं। ऐसे में सरकार में शामिल होकर जनता के बीच क्या संदेश जाएगा, इस पर भी पार्टी विचार कर रही है।
एक पद पर छह दावेदारों की चर्चा
कांग्रेस के सामने दूसरा बड़ा सवाल मंत्री पद के चेहरे को लेकर है। पार्टी में कई नेता लंबे समय से सक्रिय हैं और सभी अपनी दावेदारी मजबूत मान रहे हैं। जम्मू क्षेत्र के नेताओं के साथ-साथ कश्मीर आधारित नेताओं को भी प्रतिनिधित्व देने का दबाव है। अगर कांग्रेस किसी एक नेता को मंत्री बनाती है तो दूसरे दावेदारों में नाराजगी पैदा होने का खतरा है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व हर पहलू पर विचार कर रहा है।
उमर अब्दुल्ला सरकार का रुख
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कई बार कह चुके हैं कि कांग्रेस जब चाहे सरकार में शामिल हो सकती है और उसके लिए मंत्री पद उपलब्ध है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के बीच संबंधों को देखते हुए सरकार कांग्रेस की भागीदारी चाहती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के शामिल होने से सरकार को मजबूती मिल सकती है, लेकिन पार्टी अपने राजनीतिक एजेंडे और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखकर कदम उठाना चाहती है।
विधानसभा संख्या और गठबंधन की मजबूती
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गठबंधन की सरकार को स्थिर बनाए रखने के लिए सहयोगी दलों का साथ जरूरी है। कांग्रेस के सरकार में शामिल होने से गठबंधन को राजनीतिक मजबूती मिलेगी और विपक्ष के खिलाफ एकजुटता का संदेश जाएगा। कांग्रेस के लिए यह फैसला सिर्फ सत्ता में हिस्सेदारी का नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपनी भूमिका तय करने का भी मामला है। फिलहाल सभी की नजरें कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हैं। एक मंत्री पद, कई दावेदार और राज्य के दर्जे का मुद्दा—इन तीनों के बीच कांग्रेस को ऐसा फैसला लेना होगा जिससे पार्टी के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर संतुलन बना रहे।
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