Riyasi रियासी: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित चिनाब नदी पर बने सलाल बांध के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं, जिससे सोमवार को जलस्तर में साफ गिरावट देखी गई। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब केंद्र सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। साथ ही, सिंधु जल संधि को भी आंशिक रूप से स्थगित कर दिया गया है। सलाल बांध से पानी का प्रवाह रोकने के बाद चिनाब नदी के जलस्तर में कमी आई, जबकि रामबन जिले में चिनाब पर बने बगलिहार जलविद्युत परियोजना से पानी बहते हुए देखा गया।
PM मोदी की कार्रवाई की सराहना
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस कार्रवाई के लिए तारीफ की। उन्होंने लिखा, “पानी और हमारे नागरिकों का खून एक साथ नहीं बह सकता। आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार का यह सख्त रुख साहसिक और निर्णायक है।”
स्थानीय लोगों ने किया स्वागत
रियासी के स्थानीय निवासियों ने भी इस कदम को सराहा। एक व्यक्ति ने कहा, “पहलगाम में जो हमारे पर्यटकों को मारा गया, उसका जवाब मिलना चाहिए। हम सरकार के इस कदम से खुश हैं।” दूसरे व्यक्ति ने कहा, “पाकिस्तान को इस तरह जवाब देना जरूरी था। हम सरकार के साथ खड़े हैं।”
खून और पानी साथ नहीं बह सकते
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, “आज का भारत जानता है कि दोस्ती कैसे निभानी है और दुश्मनों से कैसे निपटना है। खून और पानी साथ नहीं बह सकते।”
सिंधु जल संधि की पृष्ठभूमि
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता से अंतिम रूप दिया गया था। इस संधि के तहत तीन पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब- पाकिस्तान को दी गई थीं। जबकि तीन पूर्वी नदियां-रावी, ब्यास और सतलुज -भारत को आवंटित की गईं। भारत को कुल पानी का 20% और पाकिस्तान को 80% पानी उपयोग का अधिकार दिया गया। यह संधि दुनिया की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल संधियों में मानी जाती है, लेकिन हालिया आतंकी घटनाओं के बाद भारत ने अब इसे फिर से समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार स्थगित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
पुलवामा के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। यह हमला 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे घातक माना जा रहा है, जब 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
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