जम्मू-कश्मीर : राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के श्रीनगर से सांसद **आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी** ने पार्टी अध्यक्ष **फारूक अब्दुल्ला** की चुनौती को स्वीकार करते हुए सांसद पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह लोकसभा सदस्यता के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ देंगे।
आगा रुहुल्ला का यह फैसला नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर चल रहे मतभेदों को और खुलकर सामने ले आया है। पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व और श्रीनगर सांसद के बीच जम्मू-कश्मीर के मुद्दों और पार्टी की नीतियों को लेकर तनाव चल रहा था।
फारूक अब्दुल्ला ने दी थी इस्तीफे की चुनौती
मामले की शुरुआत तब हुई जब नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आगा रुहुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर उन्हें लगता है कि उनकी जीत व्यक्तिगत समर्थन से हुई है तो वह सांसद पद से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़कर जनता का समर्थन हासिल करें।
फारूक अब्दुल्ला के इस बयान के बाद आगा रुहुल्ला ने भी संकेत दिए थे कि वह जल्द अपना जवाब देंगे। अब उन्होंने इस्तीफे का ऐलान कर सियासी मुकाबले को और तेज कर दिया है।
नवंबर में सौंपेंगे इस्तीफा
आगा रुहुल्ला मेहदी ने कहा है कि वह अपना इस्तीफा तुरंत नहीं बल्कि कुछ जरूरी संसदीय काम पूरे करने के बाद देंगे। उन्होंने बताया कि वह सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) से जुड़े कार्यों को पूरा करने के बाद औपचारिक रूप से पद छोड़ेंगे।
रिपोर्टों के अनुसार, वह अपने पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि के दिन नवंबर में पार्टी और सांसद पद से इस्तीफा सौंप सकते हैं।
Article 370 और पार्टी की नीतियों पर मतभेद
आगा रुहुल्ला लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उनका आरोप है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए।
उन्होंने कहा कि वह ऐसे राजनीतिक मंच पर नहीं रह सकते जहां उन्हें अपने विचारों और जनता से किए गए वादों से समझौता करना पड़े।
इस्तीफे के बाद उपचुनाव लड़ने के संकेत
आगा रुहुल्ला ने संकेत दिए हैं कि अगर श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव होता है तो वह जनता से सलाह के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
अगर वह इस्तीफा देते हैं तो श्रीनगर लोकसभा सीट खाली होगी और चुनाव आयोग को तय समय सीमा के भीतर उपचुनाव कराना होगा।
NC के लिए बढ़ी चुनौती
आगा रुहुल्ला का इस्तीफा नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। श्रीनगर और आसपास के इलाकों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियों में से एक है और फारूक अब्दुल्ला परिवार लंबे समय से पार्टी का नेतृत्व करता रहा है। ऐसे समय में पार्टी के एक प्रमुख सांसद का अलग होना संगठन के लिए चुनौती बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए समीकरण
आगा रुहुल्ला के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। अब देखना होगा कि वह भविष्य में कौन सा राजनीतिक रास्ता अपनाते हैं और क्या श्रीनगर सीट पर दोबारा चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा।
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने भी यह चुनौती होगी कि पार्टी के अंदर बढ़ते मतभेदों को कैसे संभाला जाए और अपने समर्थकों के बीच भरोसा बनाए रखा जाए।
फिलहाल आगा रुहुल्ला का इस्तीफे का ऐलान जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इसका असर केवल श्रीनगर सीट तक सीमित रहता है या नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति पर व्यापक प्रभाव डालता है।
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