कुलगाम हत्याकांड में बड़ा खुलासा, लश्कर नेटवर्क पर शक

Update: 2026-08-01 10:04 GMT

जम्मू-कश्मीर  :   कुलगाम जिले में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। इस हमले में दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस टारगेटेड हमले के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर लतीफ भट और उसके सहयोगियों का हाथ हो सकता है। एजेंसियां इस मामले में कई पहलुओं की जांच कर रही हैं और हमले में शामिल आतंकियों तक पहुंचने के लिए सुराग जुटाए जा रहे हैं।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, लश्कर कमांडर लतीफ भट के करीबी सहयोगी वारिस शाह ने कथित तौर पर हमले से पहले रेकी करने और आतंकियों को रसद उपलब्ध कराने में मदद की हो सकती है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सुरक्षा एजेंसियां सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि हमलावरों ने इस घटना को अंजाम देने के लिए एके-47 जैसे बड़े हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय छोटे कैलिबर के हथियारों का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा एजेंसियां इसे आतंकियों की बदली हुई रणनीति का हिस्सा मान रही हैं।

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के हमलों में अक्सर हाइब्रिड आतंकियों का इस्तेमाल किया जाता है। हाइब्रिड आतंकवादी वे लोग होते हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कट्टरपंथी बनाकर या किसी आतंकी नेटवर्क से जोड़कर हमलों के लिए तैयार किया जाता है। ये हमले के बाद आम नागरिकों के बीच वापस घुल-मिल जाते हैं, जिससे उनकी पहचान करना और उन्हें पकड़ना सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कुलगाम हमले का तरीका आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की रणनीति से मिलता-जुलता है। TRF को लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन माना जाता है। यह संगठन पहले भी जम्मू-कश्मीर में छोटे हथियारों के जरिए लक्षित हमलों को अंजाम देने के लिए जाना जाता रहा है।

एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि TRF की कार्यप्रणाली में आमतौर पर पिस्तौल या छोटे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। हमलावर घटना को अंजाम देने के बाद भीड़ में गायब हो जाते हैं और बड़े हथियारों का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे जांच एजेंसियों को शुरुआती स्तर पर ज्यादा सुराग नहीं मिल पाते। इसी रणनीति के कारण ऐसे हमलों की जांच में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है।

कुलगाम में हुए इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और स्थानीय नेटवर्क की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावरों को स्थानीय स्तर पर किस तरह की सहायता मिली और घटना से पहले उनकी गतिविधियां क्या थीं।

प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं जम्मू-कश्मीर में पहले भी चिंता का विषय रही हैं। आतंकी संगठन कई बार बाहरी राज्यों से आए मजदूरों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर क्षेत्र में भय का माहौल बनाने की कोशिश करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे हमलों को रोकने के लिए लगातार रणनीति में बदलाव कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों की बदलती रणनीति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। हाइब्रिड आतंकवाद और छोटे हथियारों से होने वाले हमलों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर खुफिया नेटवर्क को सक्रिय किया गया है।

फिलहाल कुलगाम हमले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों तथा उनके मददगारों की पहचान करने में जुटी हुई हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस हमले के पीछे की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों का खुलासा किया जा सकेगा।

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