श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद और अलगाववादी नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए रविवार को उत्तर कश्मीर के सोपोर में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े 26 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामले की चल रही जांच का हिस्सा है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई दस्तावेज, साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि प्रतिबंधित संगठनों और अलगाववादी नेटवर्क के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान के तहत सोपोर पुलिस ने रविवार को अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी ली। अधिकारियों के अनुसार, इन तलाशी अभियानों का उद्देश्य प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोगों, गतिविधियों और संभावित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाना तथा जांच में सामने आ रहे साक्ष्यों को सुरक्षित करना है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई सोपोर पुलिस थाने में दर्ज UAPA मामले से जुड़ी हुई है। इससे पहले भी इसी मामले में सोपोर के विभिन्न इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा चुका है। मई 2026 में पुलिस ने 15 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान भी प्रतिबंधित संगठन से संबंधित साहित्य और अन्य सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ा
सोपोर में हुई ताजा कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब जम्मू-कश्मीर में हाल के आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। 22 जुलाई को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में एक आतंकी हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक हेड कांस्टेबल की मौत हुई थी। इस घटना के बाद घाटी के कई इलाकों में सुरक्षा अभियान चलाए गए और संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर्स तथा आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई।
इसके बाद 31 जुलाई को कुलगाम जिले में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर हमला किए जाने की घटना सामने आई। इन घटनाओं ने घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अनंतनाग हमले के बाद दक्षिण कश्मीर के कई जिलों में नाके, वाहन जांच और तलाशी अभियान भी तेज किए गए थे।
दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच
रविवार को सोपोर में हुई तलाशी के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर दस्तावेजों, प्रतिबंधित संगठन से संबंधित साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लिया। अधिकारियों का कहना है कि इन सामग्रियों की जांच से मामले से जुड़े लोगों और नेटवर्क के बारे में अतिरिक्त जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है। पुलिस जांच में डिजिटल उपकरणों से मिलने वाले डेटा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी अभियान कानूनी प्रक्रिया के तहत चलाया गया। पुलिस का कहना है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े मामलों में किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।
पहले भी हुई है कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से जुड़े मामलों में सुरक्षा एजेंसियां पहले भी कार्रवाई करती रही हैं। सोपोर में मई में हुई तलाशी के दौरान पुलिस ने UAPA की धाराओं के तहत दर्ज मामले में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। उस कार्रवाई में जमिया कदीम, नसीम बाग, क्रांक्शिवन, तरजू, अमरगढ़, वारपोरा, बोमई और बोइटिंगू समेत कई क्षेत्रों का उल्लेख किया गया था। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान जब्त सामग्री को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया था।
ताजा अभियान में 26 स्थानों को शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि पुलिस मामले से जुड़े नेटवर्क की व्यापक स्तर पर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंधित संगठनों और अलगाववादी नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी जारी रहेगी।
सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति पर जोर
हाल के आतंकी हमलों के बाद घाटी में सुरक्षा एजेंसियों का जोर आतंकवादियों के साथ-साथ उनके कथित मददगारों और लॉजिस्टिक नेटवर्क की पहचान पर भी है। अनंतनाग हमले के बाद पुलिस ने घाटी के कई हिस्सों में व्यापक अभियान चलाया था और बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई थी।
सोपोर में हुई कार्रवाई इसी व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पुलिस का लक्ष्य ऐसे नेटवर्क की पहचान करना है, जो कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचा सकते हैं।
हालांकि, पुलिस ने 26 स्थानों पर तलाशी के दौरान किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की विस्तृत जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की है। जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों का कानूनी परीक्षण किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और कार्रवाई कर सकती हैं। सोपोर में हुई यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी निगरानी और अभियान को और अधिक मजबूत किया है।