Karnah करनाह,  जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौता सीमा पर रहने वाले लोगों की इच्छा है, न कि दूरदराज के शहरों में टीवी एंकरों द्वारा उठाई गई मांग। गोलाबारी से प्रभावित करनाह के दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए सीएम उमर ने कहा कि स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है, लेकिन शुक्र है कि जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन फिलहाल नुकसान का आकलन कर रहा है और आकलन पूरा होने के बाद मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम आज या कल नुकसान का आकलन पूरा कर लेंगे। जो भी मुआवजा देने की जरूरत होगी, हम देंगे।"
उन्होंने कहा कि सामुदायिक बंकर पहले बनाए गए थे, लेकिन लंबे समय से उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "कई सालों से नए बंकर नहीं बनाए गए हैं। लोग अब व्यक्तिगत बंकर की मांग कर रहे हैं। सरकार के पास एक नीति है और हम सीमा और नियंत्रण रेखा के पास रहने वालों के लिए एक योजना तैयार करेंगे।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से भी बात करेगी। सीएम उमर ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों के लोग चाहते हैं कि संघर्ष विराम जारी रहे। उन्होंने कहा, "नोएडा और मुंबई में दूर बैठे कुछ टीवी एंकर ही संघर्ष विराम को पसंद नहीं करते। सीमा और नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोग चाहते हैं कि यह जारी रहे।" मुआवजे के नियमों के बारे में उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ नियमों के तहत दुकानें मुआवजे के लिए पात्र नहीं हैं। उन्होंने कहा, "विशेष पैकेज की आवश्यकता होगी। यह सिर्फ करनाह के बारे में नहीं है। उरी, राजौरी और पुंछ जैसे अन्य क्षेत्र भी हैं जहां लोगों को सहायता की आवश्यकता है।" (केएनओ)
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