Srinagar  श्रीनगर: नव-निर्वाचित सरकार ने आज पुष्टि की कि मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में एक आधिकारिक प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की। मंत्रिमंडल ने 17 अक्टूबर की शाम को अपनी पहली बैठक के दौरान प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि, यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहस्य में डूबा रहा क्योंकि सरकार या नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। इसने विपक्ष को इस मामले पर गोपनीयता और चुप्पी बनाए रखने के लिए सरकार और एनसी की आलोचना करने का मौका दिया। विपक्ष ने कहा कि 5 अगस्त, 2009 के फैसलों (जिसने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया और अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त किया) का विरोध करने वाला प्रस्ताव मंत्रिमंडल द्वारा पारित नहीं किया गया था और इसे पारित किया जाना चाहिए था।
वास्तव में पहली कैबिनेट बैठक में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित करना मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विधानसभा चुनावों के दौरान किया गया एक वादा था। और उन्होंने इसे समय पर पूरा किया। 5 अगस्त, 2019 के निर्णयों के संबंध में, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में पहले ही विधानसभा में इन निर्णयों के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करने का वादा किया है। राष्ट्रीय समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें केंद्र से केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया गया है। समाचार एजेंसी ने बताया, "अधिकारियों ने बिना कोई विस्तृत जानकारी दिए कहा कि एलजी ने कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।"
हालांकि, आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में उपराज्यपाल द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, "जम्मू-कश्मीर कैबिनेट ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।"
इसमें कहा गया है कि राज्य का दर्जा बहाल करना एक उपचार प्रक्रिया की शुरुआत होगी, संवैधानिक अधिकारों को पुनः प्राप्त करना और जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान की रक्षा करना। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री और भारत सरकार के समक्ष मामला उठाने के लिए अधिकृत किया है। जम्मू-कश्मीर की विशिष्ट पहचान और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा नवनिर्वाचित सरकार की नीति का आधार बनी हुई है।
आधिकारिक प्रवक्ता
ने कहा कि मुख्यमंत्री इस संबंध में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के लिए आने वाले दिनों में नई दिल्ली जाएंगे।
मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को श्रीनगर में विधानसभा बुलाने का भी फैसला किया और उपराज्यपाल को विधानसभा बुलाने और उसे संबोधित करने की सलाह दी। पहले सत्र की शुरुआत में उपराज्यपाल द्वारा विधानसभा को संबोधित करने का मसौदा भी मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया, जिस पर परिषद ने आगे विचार करने और चर्चा करने का फैसला किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि परिषद ने मुबारक गुल को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने के लिए उपराज्यपाल को सिफारिश भी की, जो 21 अक्टूबर को विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे।
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