JAMMU.जम्मू: जम्मू में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जम्मू ने हाल ही में IVL (Intravascular Lithotripsy) तकनीक का इस्तेमाल करके एक जटिल और जीवन रक्षक कार्डियक प्रोसीजर सफलतापूर्वक किया। यह प्रक्रिया मरीज के हृदय में सख्त धमनियों के ब्लॉकेज को हटाने के लिए की गई, जो सामान्य तरीकों से संभव नहीं था।
एम्स जम्मू की विशेषज्ञ कार्डियोलॉजी टीम ने इस प्रक्रिया में उच्च तकनीक वाले IVL उपकरण और परिष्कृत तकनीक का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने बताया कि यह प्रोसीजर सख्त कैल्सिफाइड धमनियों को सुरक्षित रूप से खोला जाता है, जिससे ब्लड फ्लो सामान्य हो जाता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है।
एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट ने कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से मरीज को जटिल सर्जिकल प्रक्रिया या स्टेंटिंग में जोखिम कम होता है। IVL तकनीक के माध्यम से सुरक्षित, कम दर्दनाक और प्रभावी उपचार संभव हो पाया।
यह प्रोसीजर खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जिनकी धमनियां अत्यधिक कठोर या कैल्सिफाइड हैं और सामान्य एंजियोप्लास्टी तकनीकें काम नहीं करती। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की उच्च तकनीकी प्रक्रियाएं हृदय रोगियों के जीवन की रक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाती हैं।
एम्स जम्मू के निदेशक ने कहा कि संस्थान लगातार उन्नत और आधुनिक तकनीक को अपनाकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि IVL का सफल इस्तेमाल एम्स जम्मू की सर्जरी और कार्डियोलॉजी क्षेत्र में विशेषज्ञता और अनुभव को दर्शाता है।
मरीज और उनके परिवार ने डॉक्टरों और एम्स टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रोसीजर से मरीज को नई जिंदगी मिली और चिकित्सकों के प्रयासों ने उन्हें भरोसा और उम्मीद दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि IVL जैसी तकनीकें भारत में हृदय रोगियों के इलाज में नवाचार और नई उम्मीदें लेकर आई हैं। इससे जटिल मामलों में भी सुरक्षित और प्रभावी उपचार संभव होता है, जिससे मरीजों की जीवन प्रत्याशा और गुणवत्ता में सुधार होता है।
संक्षेप में, एम्स जम्मू द्वारा IVL तकनीक का सफल प्रयोग एक मील का पत्थर है। यह न केवल मरीज की जान बचाने में सफल रहा, बल्कि हृदय रोग उपचार में नई दिशा और आधुनिक तकनीक का परिचय भी प्रस्तुत करता है। इस सफलता ने एम्स जम्मू को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्डियक चिकित्सा में अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया।