Jammu: राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल करने का सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का भरोसा, मुख्यमंत्री ने जताई प्रतिबद्धता
श्रीनगर: श्रीनगर के बक्शी स्टेडिम में धूमधाम से मनाए गए 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तिरंगा फहराया और कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल करने के लक्ष्य के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उमर अब्दुला ने कहा कि 'जब मैं सीमा पार के हालात देखता हूँ तो एहसास होता है कि हमारे पूर्वजों कहना सही था- हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार।'
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा और अन्य संवैधानिक गारंटी बहाल कराने के लिए प्रतिबद्ध है जिन्हें अगस्त 2019 में खत्म कर दिया गया था। हमारी सरकार राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल करने और जम्मू-कश्मीर को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए काम करेंगे।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन हालात ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और उनके सहयोगियों के 1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों से लड़ने के फैसले को सही साबित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि हमले को रोकने की कोशिश करने के कारण एनसी नेता मास्टर अब्दुल अज़ीज़ की मुज़फ़्फ़राबाद में हत्या कर दी गई थी। अब्दुल्ला ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने 2019 में विशेष संवैधानिक गारंटी को खत्म नहीं किया होता तो पीओजेके के लोग जम्मू-कश्मीर में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रहे होते।
उन्होंने कहा कि हमने दूसरी तरफ के लिए सीटें खाली रखी हैं, इस उम्मीद में कि किसी दिन ये भरी जाएंगी। कश्मीर संघवाद को मजबूत करने के लिए राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।
जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फेडरलिज़्म के कमज़ोर होने के नतीजे अक्सर सड़कों पर देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों और जंतर-मंतर पर जो विरोध-प्रदर्शन हमने देखा, वह इसी का नतीजा था। हमारी फेडरल लिस्ट के अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य राज्यों की ज़िम्मेदारी है और आगे भी रहेगी। लेकिन एनईईटी और जेईई के ज़रिए परीक्षा का जो पैटर्न बनाया गया उसका मकसद कॉलेजों में छात्रों के दाखिले के मामले में राज्यों के अधिकार छीनना था।
उमर ने कहा कि आज़ादी का दिन सिर्फ़ जश्न मनाने का दिन नहीं बल्कि याद करने और आत्ममंथन का भी मौका है। उन्होंने कहा कि आज खुशी का दिन है, याद करने का दिन है, सोचने-समझने का दिन है। जम्मू-कश्मीर में भर्ती से जुड़े विवादों का ज़िक्र करते हुए उमर ने कहा कि भर्ती को लेकर लगे आरोपों ने युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि किसी चीज़ या सिस्टम से भरोसा उठने में बस कुछ मिनट लगते हैं लेकिन भरोसा दोबारा बनाने में सालों-साल लग जाते हैं।
उन्होंने मांग की कि जम्मू-कश्मीर में दाखिले और भर्ती की प्रक्रियाएं साफ़-सुथरी, पारदर्शी और मेरिट पर आधारित होनी चाहिए। उमर ने कहा कि सरकार को लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए और उनकी उम्मीदों व हालात के हिसाब से काम करना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष और मीडिया की भूमिका पर भी ज़ोर दिया और कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वो काम करे, विपक्ष का काम सरकार को जवाबदेह ठहराना और मीडिया का काम दोनों को जवाबदेह ठहराना है। उमर ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार उनका प्रतिनिधित्व और सेवा करती रहेगी और उनकी उम्मीदों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी।
उन्होंने राज्य का दर्जा, संवैधानिक गारंटी और विकास के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि सरकार लोगों की उम्मीदों को पूरा करने और जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए लड़ने वालों के बलिदानों का सम्मान करने के लिए काम करेगी। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर लोगों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि देश के अगले 80 साल पिछले 80 सालों की तुलना में ज़्यादा शानदार, उन्नत, भाईचारे से भरे और शांतिपूर्ण होंगे।
वहीं, जम्मू के एमए स्टेडिम में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने तिरंगा फहराया और नागरिकों को बधाई दी।
इस दौरान पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।