Guru Purnima Date: गुरु पूर्णिमा पर नदियों में स्नान और दान का महत्व, जानें शुभ मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा

Update: 2026-07-28 03:07 GMT
हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। जम्मू समेत पूरे देश में यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने गुरु, माता-पिता और मार्गदर्शकों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है। इसी कारण इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन किया और अनेक धार्मिक ग्रंथों की रचना की थी।
गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता पूजन का महत्व
शास्त्रों में माता-पिता को पहला गुरु माना गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन कई लोग अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। मान्यता है कि माता-पिता की सेवा और उनका आशीर्वाद जीवन में सुख, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
इस दिन गुरुजनों का पूजन, उन्हें वस्त्र, फल, मिठाई या अन्य श्रद्धापूर्वक उपहार अर्पित करने की परंपरा भी है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हैं और जीवन में सही मार्गदर्शन के लिए उनका आशीर्वाद लेते हैं।
नदियों में स्नान का विशेष महत्व
गुरु पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की भी विशेष धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालु गंगा, यमुना और अन्य पवित्र जल स्रोतों में स्नान कर पूजा-पाठ और दान करते हैं। मान्यता है कि पवित्र नदी में स्नान करने से मन की शुद्धि होती है और धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
जम्मू क्षेत्र में भी श्रद्धालु स्थानीय नदी घाटों और धार्मिक स्थलों पर जाकर स्नान, पूजा और दान करते हैं। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर किए जाने वाले शुभ कार्य
सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा करना
गुरु और माता-पिता का आशीर्वाद लेना
भगवान विष्णु, वेदव्यास और अपने आराध्य देव की पूजा करना
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य सामग्री का दान करना
आध्यात्मिक अध्ययन और धार्मिक कार्यों में समय देना
धार्मिक मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और सेवा भाव से किए गए कार्य जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। यह पर्व हमें ज्ञान, संस्कार और सही मार्ग दिखाने वाले गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
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