कश्मीर की सेब अर्थव्यवस्था पर संकट, हाईवे जाम को लेकर सियासी घमासान तेज
श्रीनगर। कश्मीर की सबसे बड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में शामिल सेब उद्योग इस साल भी सड़क संपर्क की समस्या से जूझता नजर आ रहा है। सेब की फसल कटाई के मौसम की शुरुआत के साथ ही श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर बार-बार हो रही रुकावटों ने किसानों, व्यापारियों और राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।
करीब 12,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था की निर्भरता लंबे समय से एक प्रमुख सड़क मार्ग पर बनी हुई है। कश्मीर से देश के अन्य हिस्सों तक सेब पहुंचाने के लिए श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे सबसे अहम संपर्क मार्ग है। ऐसे में हाईवे पर यातायात बाधित होने से हजारों किसानों और कारोबारियों को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।
सेब की तुड़ाई और आपूर्ति का समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान फल को जल्दी से बाजार तक पहुंचाना जरूरी होता है। देरी होने पर सेब की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस बार हाईवे पर लगातार आ रही बाधाओं को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने काजीगुंड पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, जहां बड़ी संख्या में फल से लदे ट्रक फंसे हुए थे।
इल्तिजा मुफ्ती ने फसल कटाई के महत्वपूर्ण समय में हाईवे की स्थिति और यातायात प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खराब होने वाले फल लेकर जा रहे ट्रकों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य की जानी चाहिए, ताकि किसानों और व्यापारियों को नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाईवे पर बार-बार लगने वाली रुकावटों से सेब उत्पादकों की परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि फल से लदे वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता दिया जाए और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए।
पीडीपी नेता ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेब उद्योग लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही का असर सीधे किसानों पर पड़ता है।
कश्मीर में सेब की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से जुड़े हैं। किसान बागों से फल तोड़ने के बाद उन्हें मंडियों तक पहुंचाते हैं, जहां से इन्हें देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है।
व्यापारियों का कहना है कि परिवहन में देरी होने से फलों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है। सेब जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए समय पर बाजार पहुंचना बेहद जरूरी होता है। हाईवे बंद होने या लंबे जाम की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र से गुजरता है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, खराब मौसम और सड़क निर्माण कार्यों के कारण कई बार यातायात प्रभावित होता है। प्रशासन समय-समय पर यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयास करता है, लेकिन सेब सीजन के दौरान दबाव काफी बढ़ जाता है।
सेब व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था जरूरी है। उनका मानना है कि केवल एक प्रमुख सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक संपर्क मार्गों और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को किसानों के हितों से जोड़ते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि सेब उद्योग को किसी भी तरह की बाधा से बचाने के लिए पहले से योजना बनानी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से हाईवे पर यातायात बहाल रखने और फंसे हुए वाहनों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
कश्मीर का सेब उद्योग हर साल लाखों टन उत्पादन करता है और देश के बाजारों में इसकी बड़ी मांग है। ऐसे में फसल के समय सड़क संपर्क की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।
हाईवे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था को केवल एक सड़क मार्ग पर निर्भर रखना कितना सुरक्षित है। किसानों और व्यापारियों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई और यातायात व्यवस्था में सुधार पर टिकी है।