बाबा अमरनाथ यात्रा अंतिम चरण में, श्रीनगर से पहलगाम रवाना हुई पवित्र छड़ी मुबारक
श्रीनगर। बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। शनिवार को भगवान शिव की पवित्र छड़ी ‘छड़ी मुबारक’ को श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़े से पारंपरिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पहलगाम के लिए रवाना किया गया। छड़ी मुबारक के साथ साधु-संतों का जत्था भी आगे बढ़ा। यात्रा के दौरान विभिन्न पारंपरिक पड़ावों पर विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
पवित्र छड़ी को महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में पहलगाम के लिए रवाना किया गया। श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए छड़ी मुबारक की यात्रा बाबा अमरनाथ तीर्थयात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक चरण मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, छड़ी मुबारक को विभिन्न पड़ावों से होते हुए पवित्र अमरनाथ गुफा तक ले जाया जाता है।
दशनामी अखाड़े में हुई विशेष पूजा
छड़ी मुबारक को पहलगाम रवाना करने से पहले श्रीनगर के दशनामी अखाड़े में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद साधु-संतों के साथ पवित्र छड़ी को यात्रा के अगले चरण के लिए रवाना किया गया।
इस दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा। साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए यात्रा की सफलता और सभी श्रद्धालुओं की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की।
छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि दशनामी अखाड़े से मुख्य तीर्थयात्रा के लिए प्रस्थान किया गया है। रास्ते में आने वाले पारंपरिक पड़ावों पर प्रतीकात्मक प्रार्थनाएं और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद पहलगाम में रात्रि विश्राम किया जाएगा।
पारंपरिक पड़ावों पर होंगे अनुष्ठान
महंत दीपेंद्र गिरि के अनुसार, छड़ी मुबारक की यात्रा के दौरान पारंपरिक धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाएगा। विभिन्न पड़ावों पर पूजा-अर्चना के बाद छड़ी मुबारक को आगे ले जाया जाएगा।
पहलगाम पहुंचने के बाद यात्रा अपने अगले चरण में प्रवेश करेगी। पवित्र छड़ी के साथ चल रहे साधु-संत इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा में शामिल होंगे। यात्रा के हर चरण का अपना धार्मिक महत्व है और श्रद्धालु इसे भगवान शिव की आराधना से जोड़कर देखते हैं।
श्रावण पूर्णिमा पर पवित्र गुफा पहुंचने की तैयारी
छड़ी मुबारक के पवित्र अमरनाथ गुफा पहुंचने का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष भी पारंपरिक कार्यक्रम के तहत छड़ी मुबारक को निर्धारित मार्ग से होते हुए पवित्र गुफा तक ले जाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर छड़ी मुबारक के पवित्र गुफा पहुंचने की तैयारी है।
श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा बाबा अमरनाथ के दर्शन और भगवान शिव की आराधना का महत्वपूर्ण अवसर होती है। छड़ी मुबारक के साथ साधु-संतों की मौजूदगी इस धार्मिक परंपरा को और विशेष बनाती है।
सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा
छड़ी मुबारक को बाबा अमरनाथ यात्रा की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। पवित्र छड़ी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और इसके साथ साधु-संतों का जत्था पारंपरिक मार्ग से पवित्र गुफा की ओर जाता है।
यात्रा के दौरान धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करते हुए छड़ी मुबारक को आगे बढ़ाया जाता है। इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ-साथ कश्मीर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की झलक भी देखने को मिलती है।
यात्रा के अंतिम चरण में बढ़ी धार्मिक गतिविधियां
बाबा अमरनाथ यात्रा के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। छड़ी मुबारक की रवानगी के साथ साधु-संतों का जत्था भी पारंपरिक यात्रा पर निकल पड़ा है। निर्धारित पड़ावों पर पूजा और अनुष्ठान के बाद यात्रा आगे बढ़ेगी।
यात्रा के इस चरण में श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए प्रशासन की ओर से भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं। पवित्र गुफा तक पहुंचने वाले मार्ग पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पहलगाम में होगा विश्राम
शनिवार को श्रीनगर से रवाना हुई छड़ी मुबारक रास्ते में आने वाले पारंपरिक पड़ावों पर पूजा-अर्चना के बाद पहलगाम पहुंचेगी। महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि पहलगाम में विश्राम के बाद यात्रा को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि छड़ी मुबारक के साथ चलने वाले साधु-संत निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद पवित्र छड़ी को अमरनाथ गुफा की ओर ले जाया जाएगा।
आस्था और परंपरा का संगम
छड़ी मुबारक की यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बाबा अमरनाथ की सदियों पुरानी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर वर्ष साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा विशेष आस्था का केंद्र रहती है।
शनिवार को दशनामी अखाड़े से पहलगाम के लिए रवाना हुई छड़ी मुबारक अब अपनी अंतिम धार्मिक यात्रा की ओर बढ़ रही है। पारंपरिक पड़ावों पर पूजा-अर्चना के बाद पवित्र छड़ी श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर अमरनाथ की पवित्र गुफा पहुंचेगी, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ बाबा बर्फानी की आराधना की जाएगी।