Amarnath : हजारों श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम से रवाना, ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंजा मार्ग

Update: 2026-07-03 05:57 GMT

Srinagar श्रीनगर : दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए शुक्रवार को सालाना तीर्थयात्रा की शुरुआत हो गई। हजारों की संख्या में श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम बेस कैंप से रवाना हुए और भगवान शिव को समर्पित इस कठिन यात्रा का आगाज किया। यात्रा शुरू होते ही पूरे मार्ग में “बम बम भोले” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।

अधिकारियों ने सुबह-सुबह दोनों प्रमुख पहाड़ी रास्तों को तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिया, जिसके बाद पहले जत्थे ने अपनी यात्रा शुरू की। सुरक्षा और व्यवस्था के बीच श्रद्धालु धीरे-धीरे गुफा मंदिर की ओर बढ़ते नजर आए। प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और विभिन्न स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

गांदरबल जिले में स्थित बालटाल मार्ग को अधिक कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता माना जाता है, जहां श्रद्धालुओं को लगभग 14 किलोमीटर की चढ़ाई एक ही दिन में पूरी करनी होती है। यह मार्ग अपेक्षाकृत छोटा लेकिन चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जहां मौसम और भू-भाग की कठिनाइयां यात्रा को और कठिन बना देती हैं।

वहीं पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 48 किलोमीटर लंबा है, जो चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरता है। यह मार्ग धीरे-धीरे ऊंचाई की ओर बढ़ता है और अंततः श्रद्धालुओं को 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर तक पहुंचाता है।

इस पवित्र यात्रा में शामिल भक्तों के लिए यह कठिन चढ़ाई केवल शारीरिक परीक्षा नहीं, बल्कि गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालु हर कदम पर भगवान शिव के दर्शन की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं और कठिन परिस्थितियों को सहन करते हुए यात्रा पूरी करते हैं।

अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मानते हैं और इसके दर्शन को अत्यंत पुण्यदायक मानते हैं। यही कारण है कि हर साल देश-विदेश से लाखों लोग इस यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं।

प्रशासन के अनुसार, यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा बल, राहत दल और आपदा प्रबंधन टीमों को विभिन्न पड़ावों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

यात्रा के दौरान मौसम भी एक महत्वपूर्ण चुनौती रहता है, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक मौसम बदल सकता है। इसलिए प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने और निर्धारित मार्गों पर ही चलने की सलाह दी है।

कुल मिलाकर, अमरनाथ यात्रा की शुरुआत श्रद्धा, आस्था और साहस का संगम लेकर आई है, जहां हजारों भक्त कठिन रास्तों पर भगवान शिव के दर्शन की कामना के साथ अपनी यात्रा पूरी करने में जुटे हैं।

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