कश्मीर में सिनेमा की खूबसूरत वापसी पानी पर तैरते पर्दे पर दिखी फिल्में
शिकारे में बैठे दर्शक झील पर चलता सिनेमा कश्मीर में लौटी पुरानी यादें
श्रीनगर: कश्मीर की खूबसूरत डल झील में इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने लोगों को पुराने सिनेमाई दौर की याद दिला दी है। पानी पर बने बड़े पर्दे और शिकारे में बैठे दर्शकों के बीच फिल्मों की स्क्रीनिंग ने घाटी में सिनेमा की नई शुरुआत का एहसास कराया है। पहली बार आयोजित हो रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (IFFJK) के दौरान डल झील पर फ्लोटिंग सिनेमा का आयोजन किया गया। यहां दर्शकों ने शिकारे में बैठकर फिल्मों का आनंद लिया, जबकि पीछे खूबसूरत पहाड़ और झील का नजारा इस अनुभव को और खास बना रहे थे।
डल झील बनी फिल्म देखने का अनोखा ठिकाना
कश्मीर की पहचान हमेशा से फिल्मों और प्राकृतिक खूबसूरती से जुड़ी रही है। कभी बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर रही घाटी में अब फिल्मों को देखने का अंदाज भी खास हो गया है। डल झील पर लगाए गए फ्लोटिंग स्क्रीन ने लोगों को सिनेमा का एक नया अनुभव दिया। दर्शक शिकारे में बैठकर पुराने दौर की फिल्मों का आनंद लेते नजर आए। पानी की लहरों के बीच फिल्म देखना कई लोगों के लिए भावुक कर देने वाला अनुभव रहा।
फिल्मों से फिर जुड़ रहा कश्मीर
कश्मीर लंबे समय तक भारतीय सिनेमा का पसंदीदा शूटिंग स्थल रहा है। यहां की वादियां, झीलें, बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सुंदरता कई फिल्मों का हिस्सा रही हैं। अब फिल्म फेस्टिवल के जरिए घाटी को दोबारा फिल्म जगत से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। फिल्म महोत्सव में देश-विदेश की 135 फिल्मों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कश्मीर की सिनेमाई विरासत को फिर से जीवंत करना और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देना है।
शिकारा चालकों को भी दिखी नई उम्मीद
डल झील पर रहने वाले शिकारा संचालकों के लिए भी यह आयोजन खास महत्व रखता है। उनका कहना है कि पुराने समय में जब फिल्मों की शूटिंग होती थी तो घाटी में अलग ही माहौल बन जाता था। अब ऐसे आयोजनों से पर्यटन और स्थानीय कारोबार को नई उम्मीद मिल रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति और लोगों को जोड़ने का जरिया भी है।
दर्शकों की आंखों में दिखी भावनाएं
फ्लोटिंग सिनेमा का अनुभव लेने पहुंचे कई दर्शकों ने इसे जिंदगी का यादगार पल बताया। झील के शांत पानी, शिकारे की सवारी और बड़े पर्दे पर चलती फिल्म ने लोगों को भावुक कर दिया। कई लोगों ने कहा कि कश्मीर में सिनेमा की वापसी केवल फिल्मों की स्क्रीनिंग नहीं बल्कि एक नई सांस्कृतिक शुरुआत है।
घाटी में नए दौर की शुरुआत
कश्मीर में सिनेमा का इतिहास काफी पुराना रहा है, लेकिन लंबे समय तक कई कारणों से फिल्म संस्कृति प्रभावित हुई। अब नए प्रयासों के जरिए घाटी में फिल्म, कला और पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। डल झील पर तैरता पर्दा और शिकारे में बैठे दर्शक कश्मीर की बदलती तस्वीर को दिखा रहे हैं। यह आयोजन न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम बना है बल्कि घाटी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक भी बनता जा रहा है।