इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय पहुंचे AIMSA प्रतिनिधि, कार्रवाई वापस लेने की मांग
Jammu and Kashmir. जम्मू-कश्मीर। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय में प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इंटर्न प्रतिनिधियों और AIMSA नेताओं ने मंत्रालय के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं। डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने इंटर्न डॉक्टरों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें मुख्य रूप से स्टाइपेंड (मानदेय) बढ़ाने और इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े विषय शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टर मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना जरूरी है। AIMSA की ओर से मंत्रालय से मांग की गई कि इंटर्न डॉक्टरों की आर्थिक और कार्य संबंधी परेशानियों को गंभीरता से लिया जाए। AIMSA अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इंटर्न डॉक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की मांग भी मंत्रालय के सामने रखी गई है। उन्होंने कहा कि छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर सकारात्मक फैसला लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेडिकल इंटर्न अपनी पढ़ाई के साथ अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देते हैं। ऐसे में उनके अधिकारों और सुविधाओं को सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्रालय से आग्रह किया कि इंटर्न डॉक्टरों से जुड़े मुद्दों पर जल्द समाधान निकाला जाए। AIMSA का कहना है कि स्टाइपेंड और अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है और अब इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
डॉ. खान ने बताया कि मंत्रालय के अधिकारियों के सामने सभी मांगों को विस्तार से रखा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में उचित निर्णय लेगी और इंटर्न डॉक्टरों को राहत मिलेगी। मेडिकल छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों के मुद्दे देश के कई हिस्सों में समय-समय पर सामने आते रहे हैं। स्टाइपेंड, काम के घंटे, प्रशिक्षण व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर छात्र संगठन अपनी मांगें उठाते रहे हैं।
AIMSA ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी तरह का विरोध नहीं बल्कि इंटर्न डॉक्टरों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना है। संगठन ने सरकार से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इन मांगों पर कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है।