मौसम विभाग की चेतावनी, घरों से निकलने में बरतें सावधानी

Update: 2026-07-19 13:30 GMT

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अगले दो दिन भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। 20 और 21 जुलाई को राज्य के पांच जिलों चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और सिरमौर में अत्यधिक बारिश की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार, इन जिलों में भारी बारिश के साथ भूस्खलन, अचानक बाढ़, नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने और सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। ऊना, हमीरपुर और शिमला जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बाकी क्षेत्रों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

पिछले 24 घंटों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई है। चंबा जिले के चुवाड़ी में सबसे अधिक 176 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो इस मानसून सीजन में अब तक की सबसे अधिक बारिश बताई जा रही है। वहीं धर्मशाला में 87 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह जुलाई महीने में 6 जुलाई 2024 के बाद सबसे अधिक बारिश में शामिल है। इससे पहले 6 जुलाई 2024 को धर्मशाला में 224 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।

भारी बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है। चंबा जिले में बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के बंद होने और यातायात बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और संबंधित विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेशवासियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने लोगों से कहा है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का गंभीरता से पालन करें। मुख्यमंत्री ने नदी-नालों, खड्डों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।

सीएम सुक्खू ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने को कहा है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है।

मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों को रेड, ऑरेंज और यलो अलर्ट के अंतर को समझने की भी सलाह दी गई है। यलो अलर्ट का अर्थ है कि मौसम खराब हो सकता है और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना रहती है। इस दौरान लोगों को मौसम की जानकारी लेते रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

ऑरेंज अलर्ट गंभीर मौसम की स्थिति को दर्शाता है। इसमें भारी से बहुत भारी बारिश, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क मार्ग प्रभावित होने जैसी घटनाओं की संभावना रहती है। ऐसे समय में प्रशासन को तैयार रहने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जाती है।

वहीं रेड अलर्ट मौसम विभाग की ओर से जारी की जाने वाली सबसे गंभीर चेतावनी होती है। इसका मतलब है कि अत्यधिक भारी बारिश से बड़े स्तर पर नुकसान की आशंका हो सकती है। इसमें बाढ़, भूस्खलन, नदी-नालों में उफान, बिजली और सड़क व्यवस्था प्रभावित होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में मानसून के दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है। आने वाले दो दिन प्रदेश के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

Tags:    

Similar News