सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के चूईनाधार गांव में एक तेंदुए के घर में घुसने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। तेंदुआ करीब 36 घंटे तक एक कमरे में बंद रहा, जिसके कारण परिवार और आसपास के लोगों में डर का माहौल बना रहा।

वन विभाग की टीम ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा।

कुत्ते का शिकार करने घर में घुसा था तेंदुआ

जानकारी के अनुसार, भलाड़-भलौना पंचायत के चूईनाधार गांव में सेवानिवृत्त शिक्षक मीना राम के घर में तेंदुआ घुस गया था।

बताया जा रहा है कि तेंदुआ घर की पहली मंजिल पर बने कमरे में कुत्ते का शिकार करने पहुंचा था। इसी दौरान कमरे में मौजूद कुत्ते और तेंदुए के बीच संघर्ष हुआ।

झड़प के दौरान अचानक कमरे का दरवाजा बंद हो गया, जिससे तेंदुआ अंदर ही फंस गया।

परिवार ने बंद किया कमरे का दरवाजा

जब परिवार के सदस्यों को घर के अंदर तेंदुए के मौजूद होने की जानकारी मिली तो उन्होंने सावधानी बरतते हुए कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।

इसके बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि घर के अंदर बंद तेंदुए को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाला जाए।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। बड़ी संख्या में लोग तेंदुए को देखने के लिए जुटने लगे, लेकिन सुरक्षा को देखते हुए लोगों को दूर रखा गया।

36 घंटे तक बना रहा डर का माहौल

तेंदुए के घर में बंद होने की खबर फैलते ही पूरे गांव में चिंता का माहौल बन गया। परिवार के सदस्य भी लगातार सावधानी बरतते रहे।

लोगों को डर था कि यदि तेंदुआ किसी तरह बाहर निकल गया तो वह आसपास के क्षेत्र में खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए वन विभाग की टीम के पहुंचने तक पूरे क्षेत्र में सतर्कता बरती गई।

वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

तेंदुए को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञों ने पूरी सावधानी के साथ अभियान चलाया। कई घंटों की मेहनत के बाद वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने में सफल रही।

रेस्क्यू के दौरान सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे, ताकि तेंदुए और लोगों दोनों को कोई नुकसान न पहुंचे।

सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा तेंदुआ

वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, स्वास्थ्य जांच के बाद उसे उपयुक्त स्थान पर छोड़ा जाएगा।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगली जानवरों के दिखाई देने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय तुरंत विभाग को सूचना दें।

ग्रामीणों में राहत

तेंदुए के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। परिवार और गांव के लोगों ने वन विभाग की टीम की कार्रवाई की सराहना की।

ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अक्सर जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बन जाता है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं

हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जंगलों के आसपास बसे क्षेत्रों में तेंदुए और अन्य जंगली जानवर कई बार भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं।

ऐसे मामलों में वन विभाग लोगों को सतर्क रहने और वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने की सलाह देता है।

चूईनाधार गांव में हुआ यह मामला भी इसी तरह की घटना है, जहां समय रहते वन विभाग की कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

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